36 JPC मीटिंग, 97 लाख हिस्सेदारों के सुझाव; वक्फ संशोधन अधिनियम मामले में केंद्र ने SC में दाखिल किया जवाब

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए अनुरोध किया कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज किया जाए। केंद्र ने एससी से कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। केंद्र ने कहा कि याचिकाएं निराधार तथ्यों के आधार पर दायर की गई हैं कि संशोधन से धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन होता है।

दिल्ली : केंद्र ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। सेंट्रल ने कहा कि पिछले 100 वर्षों से उपयोगकर्ता की ओर से वक्फ को केवल पंजीकरण के बाद ही मान्यता दी जाती है, मौखिक रूप से नहीं। लिहाजा, संशोधन बेहद जरूरी था। केंद्र सरकार ने कहा कि वक्फ परिषद और औकाफ बोर्ड में 22 सदस्यों में से अधिकतम दो गैर-मुस्लिम होंगे, यह एक ऐसा उपाय है जो सभी लोगों के विचारों का प्रतिनिधित्व करता है और वक्फ के प्रशासन में हस्तक्षेप नहीं करता है। केंद्र ने कहा कि जानबूझकर या गलत तरीके से वक्फ संपत्तियों के रूप में उल्लिखित सरकारी भूमि की पहचान राजस्व रिकॉर्ड को सही करने के लिए है और सरकारी भूमि को किसी भी धार्मिक समुदाय से संबंधित भूमि नहीं माना जा सकता है।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने दाखिल जवाब में कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट किसी भी कानून के प्रावधान पर आंशिक रूप से अंतरिम रोक नहीं लगा सकती है। न्यायिक समीक्षा करते हुए पूरे कानून पर रोक लगानी होती है। इसके अलावा ये भी माना जाता है कि संसद ने जो कानून ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझावों पर बनाया है वो सोच समझकर बनाया होगा

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