जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समर्थन में CBI का हलफनामा, केजरीवाल की कोशिशों को बताया सोची समझी साजिश

सीबीआई ने अपनी दलीलों में यह भी कहा है कि केजरीवाल को हलफनामे में बताए गए तथ्यों की जानकारी पहले से ही थी। यही वजह है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से जुड़ी जानकारी को लेकर सूचना का अधिकार का उपयोग भी उनके निर्देश पर किया गया। सीबीआई ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान उन्होंने यह मुद्दे नहीं उठाए, जिससे उनकी मंशा संदिग्ध प्रतीत होती है।

दिल्ली शराब नीति घोटाले की सुनवाई किसी और जज से करवाने की मांग वाली केजरीवाल के हलफनामे पर सीबीआई ने आपत्ति जताई है। सीबीआई ने कहा है कि 14.04.2026 का हलफनामा देर से और सुनवाई पूरी होने के बाद दाखिल किया गया है। इसके अलावा, यह हलफनामा केजरीवाल ने बाद में सोची समझी रणनीति के तहत फाइल किया है, जिसका उद्देश्य न्यायालय और व्यक्तियों को बदनाम करना है। साथ ही सीबीआई ने यह भी दलील दी है कि जब सभी पक्षों की बहस पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित हो चुका था,तब ऐसा हलफनामा दाखिल करना प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समर्थन में CBI का हलफनामा

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समर्थन में CBI का हलफनामा

केजरीवाल को पहले से जानकारी होने का दावा

सीबीआई ने अपनी दलीलों में यह भी कहा है कि केजरीवाल को हलफनामे में बताए गए तथ्यों की जानकारी पहले से ही थी। यही वजह है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से जुड़ी जानकारी को लेकर सूचना का अधिकार का उपयोग भी उनके निर्देश पर किया गया। सीबीआई ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान उन्होंने यह मुद्दे नहीं उठाए, जिससे उनकी मंशा संदिग्ध प्रतीत होती है।

सुनवाई की टाइमलाइन को लेकर उठाए गए प्रश्न

सीबीआई ने दलील दी कि 13 अप्रैल को ही कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसी दिन सुनवाई पूरी होगी। केजरीवाल ने अपनी दलीलें पूरी कर कोर्ट से चले गए,यह जानते हुए कि मामला समाप्त हो चुका है। इसके बाद हलफनामा दाखिल करना जबरदस्ती की कोशिश है।

End of Feed