प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 34 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब (दोहरी सुरंग) रोड-कम-रेल परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये है।
भारत की पहली रोड-कम-रेल सुरंग को कैबिनेट की मंजूरी (फोटो- AI)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में पहली नदी के नीचे सुरंग कोलकाता में हुगली नदी के नीचे बनाई गई थी, जिसका उपयोग मेट्रो के लिए होता है। वहीं, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत देश की पहली समुद्र के नीचे सुरंग पर काम जारी है। लेकिन गोहपुर-नुमालीगढ़ परियोजना देश की पहली ऐसी अंडर-रिवर ट्विन सुरंग होगी, जहां सड़क और रेल दोनों साथ-साथ संचालित होंगे।
छह घंटे का सफर होगा आसान
वर्तमान में एनएच-715 पर स्थित नुमालीगढ़ से एनएच-15 पर गोहपुर के बीच कनेक्टिविटी करीब 240 किलोमीटर लंबी है, जिसे तय करने में लगभग छह घंटे लगते हैं। यह मार्ग कालीाभोमोरहा रोड ब्रिज (एनएच-52) से होकर नुमालीगढ़, काजीरंगा नेशनल पार्क और बिश्वनाथ टाउन के रास्ते गुजरता है। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए इस परियोजना को चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे रोड-कम-रेल सुरंग बनाई जाएगी।
भारत की पहली अंडरवॉटर रोड-कम-रेल सुरंग
सरकार के मुताबिक, यह भारत की पहली अंडरवॉटर रोड-कम-रेल सुरंग और दुनिया की दूसरी ऐसी परियोजना होगी। इससे असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा।
यह परियोजना माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाएगी, लॉजिस्टिक लागत घटाएगी और क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगी। परियोजना का एलाइनमेंट दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-15 और एनएच-715) और दो रेलवे लाइनों से जुड़ा होगा। इसमें रंगिया-मुकोंगसेलेक रेलवे सेक्शन (एनएफआर, रंगिया डिवीजन) और फुर्काटिंग-मारियानी लूप लाइन (एनएफआर, तिनसुकिया डिवीजन) शामिल हैं।
आर्थिक और सामरिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण
परियोजना के तहत 11 आर्थिक नोड, 3 सामाजिक नोड, 2 पर्यटन नोड और 8 लॉजिस्टिक नोड से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही, यह 4 प्रमुख रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर संपर्क सुनिश्चित करेगी, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह सामरिक दृष्टि से भी अहम साबित होगी, क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी और व्यापार एवं औद्योगिक गतिविधियों के नए अवसर खोलेगी। इसके अलावा, निर्माण के दौरान लगभग 80 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
