BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स समिट सफल हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणापत्र को अपनाने का प्रस्ताव रखा। किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं उठाई। इसके साथ ही नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया गया। वहीं, समिट में ब्रिक्स देशों के राजनेता सहित दुनियाभर के कई मेहमान शामिल हुए। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शुक्रवार को ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन किया गया। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शानदार बॉन्डिंग नजर आई।
ब्रिक्स समिट 2026 में शामिल राजनेताओं की फोटो। ANI
पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग की फाइल फोटो। ANI
वहीं, शुक्रवार को बिजनेस फोरम के दौरान दोनों नेता साथ-साथ चलते नजर आए। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का हाथ थामा और उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लेकर गए. इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी उनके साथ मौजूद थे।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का हाथ थामे चलते पीएम मोदी।
ब्रिक्स में कौन-कौन देश हैं सदस्य?
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शामिल होने के बाद समूह का विस्तार हुआ। इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स के साझेदार देश बने।
भारत मंडपम में मौजूद ब्रिक्स सदस्य नेताओं की फोटो। ANI
'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' की भावना पर दिया गया जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' विषय से निर्देशित है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोगों को केंद्र में रखने वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता पहले' की भावना पर आधारित है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक अंतरराष्ट्रीय मंच है। BRICS नाम मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना है। समय के साथ इस समूह का विस्तार हुआ और इसमें कई नए देश शामिल हुए हैं। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास, वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
