क्या है अपशब्दों का इतिहास, BSP सांसद दानिश अली को गाली दे फिर से चर्चा में हैं रमेश बिधूड़ी

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  • Updated Sep 24, 2023, 05:42 PM IST

कहा जाता है कि ब्रज में जब कन्हैया गोपियों को चिढ़ाते थे तो गोपिकाएं उन्हें गालियों से नवाजती थीं। हालांकि वो गालियां कम उलाहने ज्यादा थे। लेकिन ये किवदंतियां हैं, कथाएं हैं।

रिपोर्ट- आदर्श शुक्ला: शकुनि, जयचंद, विनाश पुरुष, दोहरा चरित्र, विश्वासघात, कांव-कांव करना यहां तक की लॉलीपॉप भी ऐसे शब्द हैं, जिन्हें हमारे देश की संसद ने असंसदीय घोषित किया हुआ है। सोचिए। इंसान ने बोलना जब शुरू किया तब भाषा का आविष्कार हुआ। लेकिन गालियों का आविष्कार कब हुआ इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।

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दानिश अली को संसद के अंदर अपशब्द बोल फिर से चर्चा में हैं बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी

गालियों का इतिहास

कहा जाता है कि ब्रज में जब कन्हैया गोपियों को चिढ़ाते थे तो गोपिकाएं उन्हें गालियों से नवाजती थीं। हालांकि वो गालियां कम उलाहने ज्यादा थे। लेकिन ये किवदंतियां हैं, कथाएं हैं। लेकिन हमने ढूंढना शुरू किया कि प्राचीन काल में किस किस्म की गालियां चलती थीं। काफी खोज करने के बाद पता चला कि संस्कृत और उसके बाद प्रचलन में आई प्राकृत भाषा में कृपण, मूर्ख, दुष्ट जैसी गालियां मिलती हैं। बताओ आज आप किसी को दुष्ट या कृपण कह दो तो वो बुरा भी नहीं मानेगा। आप सोच रहे होंगे कि ये गाली पुराण क्यों शुरू हो गई है। दिल्ली के एक सांसद महोदय हैं उनकी वजह से ही ये रीसर्च करनी पड़ रही है। वैसे किम आश्चर्यम। सांसद जी हैं भी तो दिल्ली से। नाम है रमेश बिधूड़ी।

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