गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election) के दौरान अब बीजेपी (BJP) में बगावत उठने लगी है। हिमाचल चुनाव (Himachal Election) में पहले ही बीजेपी बागियों के तेवर देख चुकी है और कई सीटों पर उसे नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसी बीच खबर है कि गुजरात में टिकट बंटवारे से नाराज बीजेपी के कुछ नेता अब बगावत करने जा रहे हैं। एक ने तो निर्दलीय पर्चा भी भर दिया है।
गुजरात में बीजेपी को बागियों से खतरा
दी है धमकी
भारतीय जनता पार्टी के कम से कम एक मौजूदा विधायक और चार पूर्व विधायकों ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की धमकी दी है। इनमें से कुछ असंतुष्ट नेताओं ने कहा है कि वे समर्थकों से परामर्श करने के बाद अपना अगला कदम उठाएंगे, भाजपा के पूर्व विधायक और पार्टी के एक जाने-माने आदिवासी चेहरा हर्षद वसावा ने शुक्रवार को नंदोद सीट से निर्दलीय के रूप में अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है।
हर्षद वसावा नाराज
हर्षद वसावा गुजरात भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं और उन्होंने 2002 और 2007 के बीच और 2007 से 2012 के बीच तत्कालीन राजपीपला सीट से विधायक थे। नर्मदा जिले के नंदोद सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है। इस सीट से बीजेपी ने डॉक्टर दर्शना देशमुख को उतारा है। इस घोषणा से नाखुश, हर्षद वसावा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया और अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।
उन्होंने कहा- "यहां असली बीजेपी है और डुप्लीकेट बीजेपी है। हम उन लोगों को बेनकाब करेंगे जिन्होंने प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया और नए लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए। मैंने अपना इस्तीफा पार्टी को भेज दिया है। इस क्षेत्र के लोग जानते हैं कि मैंने एक कार्यकर्ता के रूप में कितना काम किया है।"
वडोदरा में भी बागी
इसी तरह वडोदरा जिले में एक मौजूदा और दो पूर्व भाजपा विधायक टिकट से वंचित होने के बाद पार्टी से बगावत कर बैठे हैं। वाघोडिया से छह बार के विधायक मधु श्रीवास्तव ने कहा है कि अगर उनके समर्थक चाहते हैं तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। इस सीट से बीजेपी ने अश्विन पटेल को उतारा है। वड़ोदरा जिले की पडरा सीट से भाजपा के एक अन्य पूर्व विधायक दिनेश पटेल ने भी कहा है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। यहां से बीजेपी ने चैतन्यसिंह जाला को टिकट दिया है। इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है।
कर्जन में भाजपा के पूर्व विधायक सतीश पटेल भाजपा द्वारा मौजूदा विधायक अक्षय पटेल को टिकट देने के फैसले से नाखुश हैं। अक्षय पटेल 2017 में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीते थे, लेकिन फिर 2020 में भाजपा में शामिल हो गए और बाद में उपचुनाव में भी जीते थे।
