Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में बाढ़ का पानी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। ऐसे हालात में खगड़िया जिला प्रशासन ने जलमग्न और दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस और फ्लोटिंग क्लिनिक की व्यवस्था की है। जिलाधिकारी विक्रम वीरकर के मुताबिक, इस पहल के जरिए अब तक एक हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है।
बिहार के खगड़िया के फ्लोटिंग अस्पताल में 1000 से ज्यादा मरीजों का इलाज। ANI
डीएम विक्रम वीरकर ने बताया कि खगड़िया में फ्लोटिंग अस्पताल की शुरुआत की गई है। इसके अलावा वर्ष 2020 में बिहार में फ्लोटिंग एंबुलेंस की व्यवस्था भी शुरू की गई थी। श्रावणी मेले के दौरान संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस व्यवस्था को सक्रिय किया था। इसके जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक इलाज और जरूरी दवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
नाव पर इलाज से लेकर दवाओं तक की सुविधा
फ्लोटिंग क्लिनिक में मरीजों के इलाज के लिए जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन के मुताबिक, यहां जांच और इलाज के साथ दवाओं का वितरण भी किया जाता है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी जैसी चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की गई है। खगड़िया में इस समय 16 बोट एंबुलेंस के जरिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। इन नावों में अलग-अलग प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और स्वास्थ्यकर्मी जलमग्न क्षेत्रों में जाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बच्चों के टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनके लिए बोट एंबुलेंस की व्यवस्था की है।
बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात
बिहार में इस साल बाढ़ ने बड़े इलाके को प्रभावित किया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य के 15 जिलों में 47 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण गांवों और निचले इलाकों में पानी भर गया है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में जलस्तर अब घटने लगा है, लेकिन पानी कम होने के साथ भी प्रशासन ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।बिहार में बाढ़ की स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बड़े क्षेत्र प्रभावित होते हैं। इस साल सामान्य से कम बारिश के बावजूद सितंबर की शुरुआत में गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ा और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
जब सड़कें डूबीं तो नाव बनी एंबुलेंस
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना होती है। कई जगह सड़क संपर्क टूटने या अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल होने के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को नाव के जरिए मरीजों तक पहुंचना पड़ रहा है। बिहार के दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी मेडिकल टीमें नावों के जरिए लोगों तक पहुंचकर इलाज और दवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
खगड़िया में फ्लोटिंग क्लिनिक और बोट एंबुलेंस इसी चुनौती का जवाब हैं। पानी से घिरे इलाकों में जहां सामान्य एंबुलेंस पहुंचना मुश्किल है, वहां नाव के जरिए मेडिकल टीम और दवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इससे बाढ़ के बीच मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होती है।
