दीपोत्सव का दशक : दीयों से रोशनी, रोशनी से रोजगार

अयोध्या के दीपोत्सव का यह एक दशक इस बात का सबसे ज्वलंत, प्रामाणिक और भावपूर्ण उदाहरण है कि 'दीयों की रोशनी' किस प्रकार 'रोजगार की रोशनी' में बदल सकती है। पढ़ें ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट एवं सदस्य जीएसटी ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी उत्तर प्रदेश के चेयरपर्सन मनीष खेमका का लेख।

अयोध्या का दीपोत्सव केवल आस्था की अभिव्यक्ति या सरयू के घाटों को जगमगाने वाला एक धार्मिक आयोजन भर नहीं है। यह वास्तव में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आर्थिक स्वावलंबन का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय बन चुका है, जिसने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को छुआ है। सरयू के घाटों पर जब एक साथ लाखों दीपक प्रज्वलित होते हैं, तो माटी के उस एक दीये में एक कुम्हार की मेहनत, बाती कातने वाली महिलाओं का संबल, नाविकों का संघर्ष और श्रमिकों की उजली उम्मीदें भी रोशन होती हैं। 'दीपोत्सव का दशक' इस बात का सबसे बड़ा साक्षी है कि कैसे 'दीयों की रोशनी' ने 'रोजगार की रोशनी' को जन्म दिया है।

Ayodhya Deepotsav PTI

अयोध्या में दीपोत्सव ने यहां की अर्थव्यवस्था को दिया बल

दोपोत्सव ने दीये बनाने वाले कारीगरों को नया बाजार दिया

जब हम दीपोत्सव की बात करते हैं, तो सबसे पहला चित्र उन लाखों टिमटिमाते दीयों का उभरता है, जो सरयू के तट पर अलौकिक आभा बिखेरते हैं। इन दीयों की रोशनी ने माटी कला के हमारे कारीगरों और कुम्हारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है। ये केवल माटी के दीये नहीं हैं, बल्कि उन कारीगरों की उम्मीदों के कलश हैं, जो कभी हताश और मजबूर थे, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारें उनकी व्यथा की अनदेखी करती रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 में शुरू हुए दीपोत्सव ने उन्हें एक नया बाजार, नई पहचान और अप्रत्याशित सम्मान दिया है। आज माटी कला से जुड़े हजारों-लाखों परिवारों के लिए यह आयोजन वर्ष भर की आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।

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