हिजाब को लेकर जारी बहस के बीच अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि पहनावा व्यक्तिगत पसंद का मामला है और ऐसे मामलों में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कपड़े पहनने का तरीका व्यक्तिगत पसंद के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ा हो सकता है।
चिराग पासवान।
क्या बोले चिराग पासवान
चिराग पासवान बुधवार को प्रयागराज के एक स्कूल में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली छात्रा की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वह समझ सकते हैं कि हाईकोर्ट के इस आदेश से मुस्लिम समुदाय के लोगों को निराशा हुई होगी,लेकिन यह हाईकोर्ट का फैसला है और इसकी समीक्षा सुप्रीम कोर्ट कर सकती है।
चिराग पासवान ने कहा कि ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना ही बेहतर रास्ता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिजाब पहनते हैं,जबकि कुछ लोग घूंघट करते हैं। इसलिए लोगों के पहनावे पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि यह उनकी व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने संसद में हाल में पहनावे को लेकर हुई बहस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसद के अंदर लुंगी पहनने को लेकर हुआ विवाद दुर्भाग्यपूर्ण था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और वह खुद इस तरह के तानों या टिप्पणियों में शामिल होना पसंद नहीं करते।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को अपने फैसले में कहा था कि किसी महिला के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम धर्म का ऐसा अनिवार्य हिस्सा नहीं है,जिसके न पहनने से उसकी धार्मिक आस्था खतरे में पड़ जाए।
गिरिराज सिंह ने औवैसी पर साधा निशाना
वहीं, केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा। ओवैसी ने हाईकोर्ट के फैसले को इस्लाम पर हमला बताते हुए इसकी आलोचना की थी।
गिरिराज सिंह ने सवाल उठाया कि क्या ओवैसी खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी का मानना है कि मुसलमानों को संविधान के बजाय शरीयत के अनुसार संचालित किया जाना चाहिए, तो उन्हें चोरी के आरोपियों के हाथ काटने जैसी सजा के प्रावधान को भी स्वीकार करना चाहिए। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने हाईकोर्ट के आदेश को संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया है।
