Air India 171 Crash: अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 विमान हादसे की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इस दुर्घटना की ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद संबंधित देशों और एजेंसियों से टिप्पणियां लेने की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी।
Air India विमान क्रैश की जांच
इस हादसे में विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के अधिकांश सदस्यों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। मामले में दाखिल विस्तृत काउंटर एफिडेविट में AAIB ने जांच प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय नियमों और रिकॉर्ड की गोपनीयता को लेकर विस्तार से अपना पक्ष रखा है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं की जा सकती
AAIB ने सुप्रीम कोर्ट से साफ कहा है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (CVR), एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग और उनसे जुड़े ट्रांसक्रिप्ट किसी बाहरी समिति, किसी व्यक्ति या आम जनता के साथ साझा नहीं किए जा सकते। ऐसा करना एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 के नियम 17 का उल्लंघन होगा। ब्यूरो ने बताया कि नियम 17(5) के तहत कॉकपिट की ऑडियो रिकॉर्डिंग और एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग का ऑडियो-वीडियो कंटेंट सार्वजनिक करने पर स्पष्ट कानूनी रोक है।
किन रिकॉर्ड्स पर है कानूनी गोपनीयता?
AAIB ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान एकत्र कई रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय होते हैं। इनमें शामिल हैं:
- गवाहों के बयान
- विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत
- हादसे से जुड़े लोगों की मेडिकल और निजी जानकारी
- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग
- कॉकपिट एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग
- फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा के विश्लेषण पर आधारित विशेषज्ञों की राय
इन दस्तावेजों का खुलासा तभी हो सकता है जब केंद्र सरकार यह माने कि सार्वजनिक हित जांच पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव से अधिक महत्वपूर्ण है।
जांच का मकसद दोष तय करना नहीं
AAIB ने अपने हलफनामे में कहा कि विमान दुर्घटना जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना है। इसलिए यह जांच किसी भी आपराधिक, दीवानी या अन्य न्यायिक कार्यवाही से पूरी तरह अलग होती है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हो रही जांच
ब्यूरो ने कहा कि भारत 1944 के शिकागो कन्वेंशन और उसके एनेक्स-13 के तहत विमान दुर्घटना जांच के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करता है। भारत ने इन प्रावधानों को अपने घरेलू कानून और Aircraft (Investigation of Accidents and Incidents) Rules, 2025 में शामिल किया है। AAIB के मुताबिक जांच ICAO के मैनुअल और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के अनुरूप की जा रही है।
जांच की 10 चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई जा रही
हलफनामे में AAIB ने कहा कि दुर्घटना जांच की निर्धारित 10-स्टेप प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। इसमें साक्ष्य जुटाना, तकनीकी विश्लेषण, रिकॉर्डरों की जांच, ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट तैयार करना, संबंधित देशों से टिप्पणियां लेना और उसके बाद अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करना शामिल है।
ड्राफ्ट रिपोर्ट पहले संबंधित देशों को भेजी जाएगी
AAIB ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले उसका ड्राफ्ट उन सभी देशों और एजेंसियों को भेजा जाएगा जिन्होंने जांच में भाग लिया है। उनसे प्राप्त तकनीकी टिप्पणियों पर विचार करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट जारी होगी। सामान्य तौर पर टिप्पणियां देने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर 60 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
ड्राफ्ट रिपोर्ट भी गोपनीय रहेगी
हलफनामे में कहा गया है कि ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट भी सार्वजनिक दस्तावेज नहीं होती। नियमों के मुताबिक इसे बिना अनुमति किसी को जारी या साझा नहीं किया जा सकता।
12 महीने में रिपोर्ट जारी करने का लक्ष्य
AAIB ने ICAO के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कोशिश रहती है कि दुर्घटना के 12 महीने के भीतर फाइनल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो हर वर्ष दुर्घटना की बरसी पर जांच की प्रगति और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अंतरिम बयान जारी किया जाता है।
हलफनामा के जवाब में याचिका दाखिल
यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिस पर इस वर्ष फरवरी में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने AAIB से जांच की प्रगति और अपनाई जा रही प्रक्रिया का ब्योरा मांगा था। उस समय केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि जांच भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप की जा रही है और इसका उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना।
सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की याचिका
यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें एयर इंडिया AI-171 विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत वाले मामलों में अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच मानकों के तहत उच्च स्तरीय जांच का प्रावधान है। उन्होंने AAIB की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में DGCA की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
