गुजरात के बाद अब राजस्थान में आम आदमी पार्टी (AAP) अपना दमखम दिखाती नजर आएगी। केजरीवाल की पार्टी ने राज्य में विधानसभा की सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में राजस्थान चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई है। केजरीवाल की पार्टी ने चुनाव के लिए अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होंगे। राज्य में परंपरागत रूप से मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होता आया है। लेकिन इस बार आप की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा।
राजस्थान में चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी।
गुजरात में आप ने जीतीं 5 सीटें
गुजरात विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी पांच सीटें जीतने में सफल रही और उसे 13 फीसदी वोट मिले। जबकि 35 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही। गुजरात में अपने प्रदर्शन से आप उत्साहित है और वह राजस्थान में भी पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी में है। राजस्थान में अभी कांग्रेस की सरकार है। विपक्ष में भाजपा है। हाल के चुनाव में यह देखने में आया है कि जहां भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, वहां आप को फायदा पहुंचा है। दिल्ली, पंजाब और गुजरात से इसे समझा जा सकता है।
गुरुवार को दिल्ली में हुई अहम बैठक
राज्य में चुनावों की तैयारियों को लेकर गुरुवार को दिल्ली में आप के चुनावी रणनीतिकार संदीप पाठक की अगुवाई में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के राजस्थान इकाई के नेता एवं सदस्य शामिल हुए। बैठक में नेताओं से कहा गया कि वे चुनावी मोड में आ जाएं और राज्य में सियासी गतिविधियां तेज करें। राजस्थान में पार्टी के प्रभारी विनय मिश्रा भी इस बैठक में शामिल हुए। उन्होंने राज्य में पार्टी की ओर से किए गए कार्यों की समीक्षा की। मिश्रा ने आगामी चुनावों के मुद्देनजर आप की रणनीति पर लंबी चर्चा की।
200 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी AAP
रिपोर्टों के मुताबिक मिश्रा का कहना है कि राजस्थान से पार्टी के बारे में जो फीडबैक मिला है, वह उत्साहित करने वाला है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। हम अपनी सांगठनिक क्षमता को और मजबूत बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी।
कांग्रेस की बढ़ेंगी मुश्किलें
चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि राजस्थान में केजरीवाल की पार्टी यदि चुनाव लड़ती है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस पार्टी को होगा। क्योंकि मोटे तौर पर वह कांग्रेस के वोटों में ही सेंधमारी करती है। हाल के गुजरात चुनाव में भी यही देखने को मिला है। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच गतिरोध एवं टकराव पहले से चला आ रहा है। चुनाव के समय में कांग्रेस के इन दोनों दिग्गज नेताओं में टकराव यदि बढ़ेगा तो आप इसका भरपूर फायदा उठाने की कोशिश करेगी।
