AAP सांसद राघव चड्डा ने संसद में बोलते हुए लोगों के लिए एक जरूरी मांग उठाई। उन्होंने सालाना हेल्थ चेकअप को कानूनी अधिकार बनाए जाने की बात रखी। ये मांग रखते हुए सांसद ने देश भर से आ रहे अचानक हार्ट अटैक के मामलों का हवाला दिया साथ ही नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों से बताया कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का भी चेकअप कराने में लोग इस कदर अक्षम हैं कि केवल 2 फीसदी महिलाएं ही इसकी जांच करा पाती हैं। उन्होंने देश स्वास्थ्य जांच को लक्जरी भी कहा क्योंकि इसे करवाना गरीब के बस की बात नहीं है।
राज्यसभा में राघव ने उठाया हेल्थ चेकअप का मुद्दा (फाइल फोटो | PTI)
हेल्थ चेकअप को कानूनी अधिकार बनाने की मांग
चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि "हर नागरिक के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच को कानूनी अधिकार बनाया जाए। कोविड-19 के बाद दिल के रोगों और अन्य बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
अगर समय रहते बीमारी का पता चल जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। कई देशों में सरकार नागरिकों की सालाना स्वास्थ्य जांच का खर्च उठाती है और इसे अनिवार्य बनाती है। तो फिर भारत में क्यों नहीं? स्वास्थ्य सेवा सिर्फ अमीरों का विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए। जांच है तो जान है।"
क्या बोले सांसद
संसद में इस मुद्दे पर बोलते हुए चड्ढा ने कहा कि भारत में सालाना स्वास्थ्य जांच एक लक्जरी बन चुका है, जिसका लाभ केवल पैसे वाले लोग ले सकते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे लोगों को स्थिति गंभीर होने के बाद बीमारियों का पता लग पाता है। आगे उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद हमने बहुत कुछ देखा। आए दिन वीडियो आते हैं कि कैसे कोई क्रिकेट खेलते समय हार्ट अटैक का शिकार हो जाता है, कोई दूल्हा अपनी शादी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मर जाता है, मासूम बच्चे दौड़ते-दौड़ते दम तोड़ देते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि देश की केवल 2 प्रतिशत महिलाएं ही कैंसर की जांच करवा पाती हैं।
आगे उन्होंने सरकार से मांग की कि सरल और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था देश के हर कोने में दी जाए। देश के हर नागरिक को वार्षिक स्वास्थ्य जांच का कानूनी अधिकार मिले, ताकि बीमारी जल्दी पकड़ी जा सके।
