मुंबई एयरपोर्ट पर सितंबर 2023 में वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के लियरजेट विमान के साथ हुए हादसे की जांच रिपोर्ट में विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने पायलटों की गलतियों को दुर्घटना का प्रमुख कारण बताया है।
जानें 2023 के Learjet हादसे पर AAIB की रिपोर्ट में क्या-क्या हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विमान के अस्थिर अप्रोच के बावजूद लैंडिंग जारी रखने का फैसला किया गया। इसके बाद कम ऊंचाई पर विमान एयरोडायनामिक स्टॉल का शिकार हो गया और चालक दल विमान को संभाल नहीं पाया।
एएआईबी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में दुर्घटना के संभावित कारणों के साथ कई सहायक कारकों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट में वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के पायलटों और रखरखाव कर्मचारियों की प्रक्रियाओं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के लिए निर्धारित मानकों और विमानन नियामक डीजीसीए की भूमिका से जुड़े सुधारों की सिफारिशें की गई हैं। ब्यूरो ने कुल 10 सिफारिशें दी हैं, जिनका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं का जोखिम कम करना है।
वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड वही विमान ऑपरेटर है, जिसका एक विमान बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत हो गई थी। हालांकि, मुंबई में 2023 के हादसे और बारामती की दुर्घटना को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
अस्थिर अप्रोच के बावजूद लैंडिंग जारी रखने का फैसला बना दुर्घटना की वजह
एएआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना का संभावित कारण फ्लाइट क्रू का अस्थिर अप्रोच के बावजूद लैंडिंग जारी रखने का फैसला था। उस समय मौसम की स्थिति भी अनुकूल नहीं थी। इसके साथ ही विमान को संभालने के तरीके में भी खामियां सामने आईं, जिसके चलते कम ऊंचाई पर विमान एयरोडायनामिक स्टॉल का शिकार हो गया। इसके बाद चालक दल विमान को स्टॉल से बाहर निकालने में सफल नहीं हो सका।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हादसे के पीछे केवल एक कारण नहीं था, बल्कि कई परिस्थितियों और प्रक्रियागत चूकों ने मिलकर दुर्घटना का जोखिम बढ़ाया।
पायलटों की इन गलतियों का रिपोर्ट में जिक्र
एएआईबी ने दुर्घटना में योगदान देने वाले कई कारकों की पहचान की है। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट क्रू ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं किया और विमान की घटती एयरस्पीड से जुड़े संकेतों पर उचित निगरानी नहीं रखी।
इसके अलावा, पायलट मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी निभा रहे क्रू सदस्य ने गो-अराउंड यानी लैंडिंग का प्रयास छोड़कर विमान को दोबारा ऊपर ले जाने का निर्देश देने में देरी की। रिपोर्ट में इसे भी दुर्घटना में योगदान देने वाला कारक बताया गया है।
जांच में उस समय मौजूद खराब मौसम और तेज टेलविंड का भी उल्लेख किया गया है। इन परिस्थितियों ने पायलटों को विमान की स्थिति का आकलन करने के लिए मिलने वाले दृश्य संकेतों को प्रभावित किया। इसके अलावा, मुंबई एयरपोर्ट पर लागू समय संबंधी प्रतिबंध के कारण निर्धारित समय से पहले विमान उतारने की जल्दबाजी को भी हादसे में योगदान देने वाला कारक माना गया है।
वीएसआर वेंचर्स और DGCA के लिए क्या सिफारिशें?
एएआईबी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में कुल 10 सिफारिशें की हैं। इनमें विमान ऑपरेटर VSR Ventures, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के लिए सुधारात्मक कदम सुझाए गए हैं।
VSR Ventures के पायलटों को SOP का पालन सुनिश्चित करने की सलाह: रिपोर्ट में ऑपरेटर से कहा गया है कि वह अपने पायलटों को कॉकपिट में चैलेंज-एंड-रिस्पॉन्स चेकलिस्ट का सही ढंग से पालन करने के लिए जागरूक करे। इसमें विमान की सेटिंग्स की पुष्टि करना और सुरक्षित संचालन के लिए सभी प्रणालियों को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार कॉन्फिगर करना शामिल है।
विमान के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड दुरुस्त रखने पर जोर: VSR Ventures के रखरखाव और इंजीनियरिंग कर्मचारियों को तकनीकी लॉगबुक और एयरफ्रेम लॉगबुक जैसे दस्तावेज निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार बनाए रखने की सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान के रखरखाव और तकनीकी स्थिति से जुड़ी सभी जरूरी प्रविष्टियां समय पर दर्ज हों।
एटीसी के लिए वेक टर्बुलेंस से जुड़े नियमों का पालन: AAIB ने AAI से एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को विमानों के बीच निर्धारित दूरी बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक करने को कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमानों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है, ताकि आगे उड़ रहे विमान के पीछे बनने वाली हवा की अशांति यानी वेक टर्बुलेंस से जुड़े जोखिम को कम किया जा सके। इसके लिए MATS-I में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने पर जोर दिया गया है।
डीजीसीए को ऑपरेटरों के मैनुअल की समीक्षा करने की सलाह: रिपोर्ट में DGCA से कहा गया है कि वह विमान ऑपरेटरों की ओर से जमा किए गए मैनुअल की जांच करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे मौजूदा नियमों के अनुरूप हैं।
पायलटों की सिम्युलेटर ट्रेनिंग में बदलाव की सिफारिश
एएआईबी ने पायलटों की आवधिक यानी रिकरेंट ट्रेनिंग से जुड़ी आवश्यकताओं की भी समीक्षा करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि DGCA मौजूदा ट्रेनिंग व्यवस्था पर दोबारा विचार करे और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रावधानों में बदलाव करे।
इसमें खास तौर पर विमान के स्टॉल से उबरने की ट्रेनिंग पर जोर दिया गया है। सिफारिश के मुताबिक, पायलटों को सिम्युलेटर ट्रेनिंग के दौरान चढ़ाई, क्रूज, अप्रोच और लैंडिंग जैसी अलग-अलग उड़ान स्थितियों में फुल स्टॉल या स्टॉल वॉर्निंग डिवाइस सक्रिय होने के बाद विमान को सुरक्षित स्थिति में लाने का अभ्यास कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा, DGCA से नॉन-शेड्यूल्ड और जनरल एविएशन संगठनों के फिक्स्ड-विंग पायलटों के ट्रेनिंग रिकॉर्ड की एक बार विशेष जांच करने को भी कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सत्यापित करना है कि प्रत्येक सिम्युलेटर ट्रेनिंग के दौरान सभी अनिवार्य अभ्यास पूरे कराए जा रहे हैं या नहीं।
क्यों अहम है एएआईबी की यह रिपोर्ट?
मुंबई में 2023 के Learjet हादसे की फाइनल रिपोर्ट विमानन सुरक्षा से जुड़े कई अहम पहलुओं को सामने लाती है। इसमें पायलटों के निर्णय, एयरस्पीड की निगरानी, गो-अराउंड की प्रक्रिया, मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया है।
रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों का मकसद केवल संबंधित ऑपरेटर की प्रक्रियाओं में सुधार करना नहीं, बल्कि पायलटों की ट्रेनिंग, विमान के रखरखाव के रिकॉर्ड और विमानन सुरक्षा के नियामकीय मानकों को मजबूत करना भी है। इन सिफारिशों पर संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
