CJP Tiranga March: दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस पर शुक्रवार को पूरे दिन गहमा-गहमी रही। सुबह से ही दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में कनॉट प्लेस और इसके आस-पास इलाकों में तैनात हो गए। यह तैनाती कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च को रोकने के लिए थी। निषेधाज्ञा लागू होने से सीजेपी के इस मार्च को अनुमति नहीं थी। इसके बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया गया। शनिवार तड़के नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया जबकि दिपके को पुलिस ने गिरफ्तार किया। दिपके को शनिवार दोपहर के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि पुलिस कोर्ट से दिपके को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की इजाजत मांगेगी।
प्रदर्शन का पूरा मामला क्या है?
सीजेपी और छात्र संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों संगठन उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिपके ने यह तिरंगा यात्रा सीजेपी प्रवक्ताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की 13 अक्टूबर की गिरफ्तारी के बाद बुलाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को डी-नोटिफाई किए गए जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए मुंबई से आ रहे दिपके, दास और रांका को दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिया गया था। कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अगले दिन तीनों को रिहा कर दिया। रिहाई एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त पर हुई।

neha bora
ऐलान से हिरासत और फिर गिरफ्तारी तक
पुलिस ने कनॉट प्लेस के आसपास भारी सुरक्षा तैनात की और सेंट्रल पार्क बंद कर दिया। ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी हुई। खबरों के मुताबिक करीब 30 हजार जवान तैनात थे। दिपके को पहले दो नोटिस दिए गए थे, जिनमें सेंट्रल पार्क न जाने और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त थी। शुक्रवार शाम दिपके को झंडेवालान स्थित आवास से और बोरा को मंडी हाउस इलाके से हिरासत में लिया गया। बोरा ने करीब 5:20 बजे मार्च को मंडी हाउस की ओर मोड़ा था, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें भी पकड़ लिया गया।
कनॉट प्लेस में दिनभर क्या हुआ
आयोजकों के हिरासत में होने के बावजूद लोग रुके नहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों समेत सैकड़ों लोग तिरंगा लेकर जुटे और लोकतंत्र तथा संविधान के नारे लगाए। इससे पहले मंडी हाउस से कनॉट प्लेस तक तिरंगा यात्रा भी निकली थी। जब पुलिस प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर ले जाने लगी, तो कुछ लोगों ने बस रोकने की कोशिश की। दफ्तर छूटने के समय हुए प्रदर्शन से इनर और आउटर सर्कल में जाम लग गया। पालिका बाजार के दुकानदारों का एक समूह भी पहुंचा, जिससे प्रदर्शनकारी और कारोबारी आमने-सामने आ गए।
पुलिस सूत्रों के अनुसार शाम तक करीब 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए जा चुके थे। निषेधाज्ञा उल्लंघन के आरोप में कई एफआईआर भी दर्ज हुई हैं। पुलिस ने कहा है कि नियम बार-बार तोड़ने वालों पर सख्ती होगी।

Abhijeet dipke
हिरासत पर सवाल
आइसा ने दावा किया कि बोरा को मंगोलपुरी के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स में अकेले रखा गया है। संगठन के मुताबिक वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया गया। कॉजपा और आइसा ने दिपके व बोरा का ठिकाना न पता होने की बात कही। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तिरंगा फहराने पर लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। डीएमके प्रमुख स्टालिन ने ठिकाना न बताकर हिरासत को 'पूरी तरह गैरकानूनी' कहा और दोनों की तुरंत रिहाई मांगी। ममता बनर्जी ने भी दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। सीपीआई सांसद पी संतोष कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। 'आपको प्रिवेंटिव डिटेंशन में रख रहे हैं'... दिपके-नेहा को हिरासत में लिए जाने तक, 'तिरंगा मार्च' को लेकर चले हाई वोल्टेज ड्रामा में दिनभर क्या हुआ?
रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने क्या कहा
शनिवार तड़के नेहा बोरा को एहतियाती हिरासत से रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिपके को आज विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। पीटीआई के अनुसार दिपके के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई हुई है। मीडिया से बातचीत में बोरा ने कहा, 'कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई बहुत बड़े अपराधी हों। यह चलन इस देश में लंबे समय से चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को कैसे हिरासत में लिया जा रहा है। चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत लोगों को पूरी रात हिरासत में रखना जायज है?'
