Koshi Barrage: उत्तर बिहार के लिए वरदान या अभिशाप, क्या है कोसी बैराज के निर्माण की कहानी ?

  • Agency by: Agency
  • Updated Nov 4, 2022, 12:25 AM IST

कोसी नदी हर साल अपनी धारा बदलने के लिए जानी जाती है। जिस वजह से उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, इसलिए कोसी नदी को बिहार का शोक कहा गया है। क्या है इस नदी पर तटबंध निर्माण की कहानी !

KEY HIGHLIGHTS
  • अंग्रेजों के शासनकाल में ही बनाई गई थी कोसी नदी पर तटबंध निर्माण की योजना
  • कोसी नदी तटबंध योजना पर भारत और नेपाल सरकार ने मिल कर किया काम
  • देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था कोसी परियोजना का शिलान्यास

कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। बिहार में हर साल किसी ना किसी हिस्से में बाढ़ आती ही है। उत्तर बिहार का अधिकतर हिस्सा बाढ़ प्रभावित रहता है। साल 2008 में बिहार को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा था। कोसी गंगा नदी की सहायक नदी है, कोसी नदी नेपाल के पहाड़ो से निकलकर बिहार में भीमनगर के रास्ते बहती हुई प्रवेश करती है और कटिहार जिले के कुर्सेला के पास गंगा में मिल जाती है। कोसी नदी हर साल अपना धारा बदलने के लिए भी जानी जाती है, इस वजह से हर साल लाखों लोग कोसी नदी के बाढ़ से प्रभावित होते है। पौराणिक कथाओं में इस नदी का नाम कौशिकी नदी होने का भी वर्णन है।

KOSI River in Bihar

कोसी नदी तटबंध योजना पर भारत और नेपाल सरकार ने मिल कर किया काम

कैसे हुआ कोसी बैराज का निर्माण

End of Feed