हर जत्थे में होंगे 50 श्रद्धालु
कैलाश मानसरोवर यात्रा
विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, कंप्यूटर आधारित और जेंडर बैलेंस को ध्यान में रखकर की गई। चुने गए 1000 श्रद्धालुओं को 20 जत्थों में बांटा गया है, जिनमें प्रत्येक दल में 50 श्रद्धालु होंगे।
कब शुरू होगी यात्रा
मानसरोवर यात्रा जून 2026 में शुरू होकर अगस्त तक चलेगी। श्रद्धालु चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन करेंगे, जिसे हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि लिपुलेख और नाथुला दोनों मार्ग पूरी तरह से वाहनों के चलने लायक हो चुके हैं, जिससे यात्रियों को बहुत कम पैदल यात्रा करना पड़ेगा। चुने गए तीर्थयात्री 20 जत्थों में यात्रा करेंगे; हर जत्थे में 50 तीर्थयात्री होंगे, जो लिपुलेख और नाथुला दर्रों के रास्ते अपनी यात्रा पूरी करेंगे।
आसान हुआ सफर
लिखलेख और नाथुला दर्रे के रास्ते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा अब आसान हो गई, क्योंकि यह रास्ते वाहनों के चलने लायक हो गए हैं। ऐसे में यात्रियों को ज्यादा चलना नहीं पड़ेगा। आपको बता दें कि जन श्रद्धालुओं के नाम का चयन हुआ है, उन्हें ईमेल और एसएमएस के जरिए इसकी जानकारी भेजी गई है।
सनद रहे कि हाल ही में नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते होने वाली सालाना तीर्थयात्रा की तैयारियों पर आपत्ति जताई थी। नेपाल का दावा था कि यह उसका हिस्सा है। हालांकि, भारत ने नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और अपने रुख को स्पष्ट किया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा करीब पांच साल के अंतराल के बाद पिछले वर्ष फिर से शुरू हुई थी। साल 2020 में कोविड-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य तनाव के कारण यात्रा स्थगित कर दी गई थी।
