PM Modi Speech In Parliament: PM मोदी के भाषण की वो 10 बड़ी बातें, जिसमें झलक रही भारत के इतिहास और भविष्य की तस्वीरें

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Sep 18, 2023, 12:13 PM IST

PM Modi Speech In Parliament: पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब देश आजाद हुआ तो विश्व का आशंका थी कि ये देश चलेगा या नहीं, लोकतत्रं रहेगा या नहीं, लेकिन इस संसद ने उन्हें गलत साबित कर दिया। पीएम मोदी ने इस दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के योगदान को भी याद किया।

PM Modi Speech In Parliament: पीएम मोदी ने संसद के विशेष सत्र के दौरान अपने संबोधन में जो बातें कहीं है, उसमें भारत के भविष्य की तस्वीर झलकती दिख रही है। पीएम मोदी ने भारत के इतिहास से लेकर वर्तमान तक याद किया और कहा कि देश ने उन्हें बहुत सम्मान दिया।

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संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभी में पीएम मोदी

पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

  1. हम सबके लिए गर्व की बात है कि आज भारत 'विश्व मित्र' के रूप में अपनी जगह बना पाया है। आज पूरा विश्व, भारत में अपना मित्र खोज रहा है, भारत की मित्रता का अनुभव कर रहा है।
  2. चंद्रयान-3 की सफलता से आज पूरा देश अभिभूत है। इसमें भारत के सामर्थ्य का एक नया रूप जो आधुनिकता, विज्ञान, technology, हमारे वैज्ञानिकों और जो 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प की शक्ति से जुड़ा हुआ है। वो देश और दुनिया पर नया प्रभाव पैदा करने वाला है।
  3. अमृतकाल की प्रथम प्रभा का प्रकाश, राष्ट्र में एक नया विश्वास, नया आत्मविश्वास, नई उमंग, नए सपनें, नए संकल्प और राष्ट्र का नया सामर्थ्य उसे भर रहा है। आज चारों तरफ भारतवासियों की उपलब्धि की चर्चा गौरव के साथ हो रही है।
  4. हम भले नए भवन में जाएंगे लेकिन पुराना भवन भी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देगा। ये भारतीय लोकतंत्र की स्वर्णिम यात्रा को बताएगा। 75 वर्ष की हमारी यात्रा ने अनेक लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं का उत्तम से उत्तम सृजन किया है और इस सदन के सभी सदस्यों ने उसमें सक्रियता से योगदान दिया है।
  5. जी-20 की सफलता किसी व्यक्ति या दल की नहीं बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की सफलता है। बदलते वक्त के साथ हमारे सदन की संरचना भी बदलती रही है और अधिक समावेशी बनती गई है। समाज का हर वर्ग विविधताओं से भरा हुआ है, जिसकी झलक सदन में दिखती है।
  6. आजादी के बाद इसे संसद भवन के रूप में पहचान मिली। यह सही है कि इस इमारत(पुराने संसद भवन) के निर्माण करने का निर्णय विदेश शासकों का था, लेकिन यह बात हम न कभी भूल सकते हैं और हम गर्व से कह सकते हैं इस भवन के निर्माण में पसीना मेरे देशवासियों का लगा था, परिश्रम मेरे देशवासियों का लगा था और पैसे भी मेरे देश के लोगों के थे।
  7. पिछले 75 वर्षों में हमारी उपलब्धि यही है कि देश के सामान्यजन का इस संसद पर विश्वास बढ़ता ही गया है। इस महान संस्था के प्रति लोगों का अटूट विश्वास बना रहे।
  8. सदन के इतिहास में करीब 7500 से अधिक जनप्रतिनिधि दोनों सदनों में मिलकर अपना योगदान दे चुके हैं। इस कालखंड में करीब 600 महिला सांसदों ने भी दोनों सदनों में गरिमा को बढ़ाया है।
  9. बांग्लादेश की मुक्ति का आंदोलन और उसका समर्थन भी इसी सदन ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में किया था।
  10. जब मैंने पहली बार एक सांसद के रूप में इस भवन में प्रवेश किया, तो सहज रूप से मैंने इस सदन के द्वार पर अपना शीश झुकाकर, इस लोकतंत्र के मंदिर को श्रद्धाभाव से नमन किया था। वो पल मेरे लिए भावनाओं से भरा हुआ था। मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था, लेकिन ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है और भारत के सामान्य मानवी की लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा का प्रतिबिंब है कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजारा करने वाला एक गरीब परिवार का बच्चा पार्लियामेंट में पहुंच गया।

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