World Osteoporosis Day: हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन D जरूरी हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज, थायरॉइड और किडनी से जुड़ी बीमारियां भी आपकी हड्डियों को अंदर से कमजोर कर सकती हैं? कई बार हड्डियों की जांच सामान्य आने के बावजूद फ्रैक्चर का खतरा बना रहता है। जानिए ऐसा क्यों होता है और किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।
बीमारियों का हड्डियों पर असर: क्या लंबे समय तक दवाएं खाने से भी हड्डियां कमजोर होती हैं (AI Image)
क्या डायबिटीज और थायरॉइड से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं
दिल्ली के सी के बिरला हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डायरेक्टर डॉ. अश्वनी मैचंद का कहना है कि आमतौर पर जब हड्डियों की मजबूती की बात होती है, तो सबसे पहले कैल्शियम, विटामिन D और एक्सरसाइज का ख्याल आता है। लेकिन हड्डियों की सेहत सिर्फ इन तीन चीजों पर निर्भर नहीं करती। शरीर में हार्मोन का संतुलन, ब्लड शुगर का स्तर, किडनी की कार्यक्षमता और कई पुरानी बीमारियां भी हड्डियों पर असर डालती हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों की हड्डियां बिना किसी बड़े लक्षण के धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
डॉ. अश्वनी मैचंद के अनुसार, डायबिटीज और थायरॉइड जैसी बीमारियां हड्डियों के बनने और टूटने की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इससे ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। खास बात यह है कि कुछ मरीजों में बोन डेंसिटी की रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद हड्डियों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
डायबिटीज का हड्डियों पर क्या असर पड़ता है
डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारी नहीं है। लंबे समय तक इसका असर शरीर के कई अंगों के साथ हड्डियों पर भी पड़ सकता है। टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में इंसुलिन की कमी के कारण हड्डियों का विकास और उनका घनत्व प्रभावित हो सकता है। इससे हड्डियां अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती हैं।
वहीं, टाइप 2 डायबिटीज में स्थिति थोड़ी अलग होती है। ऐसे मरीजों में बोन डेंसिटी सामान्य या ज्यादा भी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी हड्डियां पूरी तरह स्वस्थ हैं।
डॉक्टर के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से शरीर में एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (AGEs) जमा हो सकते हैं। ये हड्डियों में मौजूद कोलेजन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। कोलेजन हड्डियों को मजबूती देने के साथ उन्हें टूटने से बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, डायबिटीज के कारण नसों को नुकसान, नजर कमजोर होने और अचानक ब्लड शुगर कम होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इनसे व्यक्ति के गिरने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में फ्रैक्चर का खतरा अधिक हो सकता है।
थायरॉइड बढ़ने से हड्डियां कमजोर क्यों होने लगती हैं
थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म के साथ हड्डियों की सेहत को भी नियंत्रित करते हैं। हमारी हड्डियों में पुरानी कोशिकाओं के हटने और नई हड्डियां बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इसे बोन टर्नओवर कहा जाता है।
जब शरीर में थायरॉइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो हड्डियों के टूटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। ऐसे में नई हड्डियां उतनी तेजी से नहीं बन पातीं और धीरे-धीरे उनका घनत्व कम होने लगता है।
इस स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म कहा जाता है। यदि लंबे समय तक इसका इलाज न हो, तो ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. मैचंद बताते हैं कि थायरॉइड हार्मोन की दवा जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेने से भी हड्डियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेष रूप से बुजुर्गों और मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
क्या हाइपोथायरॉइडिज्म भी हड्डियों के लिए नुकसानदायक है
हाइपोथायरॉइडिज्म में शरीर जरूरत से कम थायरॉइड हार्मोन बनाता है। हालांकि, यह स्थिति हाइपरथायरॉइडिज्म की तरह सीधे तौर पर हड्डियों के तेजी से कमजोर होने से नहीं जुड़ी है।
लेकिन यदि बीमारी लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे, तो मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में दर्द और शरीर की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। दूसरी बीमारियां या इलाज से जुड़ी समस्याएं होने पर हड्डियों की सेहत भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए थायरॉइड के मरीजों को नियमित जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा की मात्रा नहीं बदलनी चाहिए।
सिर्फ डायबिटीज और थायरॉइड नहीं, ये 4 स्थितियां भी बढ़ाती हैं हड्डियों के कमजोर होने का खतरा
- क्रॉनिक किडनी डिजीज: किडनी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। साथ ही विटामिन D को सक्रिय रूप देने में भी इसकी भूमिका होती है। किडनी की कार्यक्षमता घटने पर हड्डियों और मिनरल्स का संतुलन बिगड़ सकता है।
- रूमेटॉइड आर्थराइटिस: इस बीमारी में शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है। इससे हड्डियों को नुकसान पहुंच सकता है। शारीरिक गतिविधियां कम होने और स्टेरॉयड दवाओं के लंबे इस्तेमाल से जोखिम और बढ़ सकता है।
- सीलिएक डिजीज: इस बीमारी में आंतों की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कैल्शियम और विटामिन D की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
- समय से पहले मेनोपॉज: महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेनोपॉज के बाद इस हार्मोन का स्तर घटने से बोन डेंसिटी कम होने लगती है। समय से पहले मेनोपॉज होने पर यह जोखिम कम उम्र में ही बढ़ सकता है।
क्या लंबे समय तक दवाएं खाने से भी हड्डियां कमजोर होती हैं
कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन हड्डियों की मजबूती पर असर डाल सकता है। इनमें विशेष रूप से प्रेडनिसोलोन जैसी ओरल स्टेरॉयड दवाएं शामिल हैं।
इन दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से हड्डियों का घनत्व घट सकता है और फ्रैक्चर की आशंका बढ़ सकती है। मिर्गी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी हड्डियों के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज अपनी दवाएं बंद कर दें। डॉक्टर मरीज की बीमारी, दवा की मात्रा और इलाज की अवधि के आधार पर जोखिम का आकलन करते हैं। जरूरत पड़ने पर दवा की समीक्षा या हड्डियों की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।
किन लोगों को करवानी चाहिए बोन डेंसिटी की जांच
डॉ. मैचंद के अनुसार, लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को हड्डियों की सेहत के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं, बुजुर्गों, मामूली चोट से फ्रैक्चर झेल चुके लोगों और लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले मरीजों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार DXA स्कैन कराने की सलाह दे सकते हैं। यह जांच हड्डियों का घनत्व मापती है और ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाने में मदद करती है।
हालांकि, डायबिटीज वाले मरीजों में सिर्फ सामान्य DXA रिपोर्ट के आधार पर फ्रैक्चर के खतरे को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इसलिए डॉक्टर मरीज की उम्र, पुरानी बीमारियों, दवाओं और फ्रैक्चर की हिस्ट्री को भी ध्यान में रखते हैं।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ कैल्शियम सप्लीमेंट लेना काफी नहीं है। रोजमर्रा की कुछ आदतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं।
- कैल्शियम और प्रोटीन लें: डाइट में दूध, दही, पनीर और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- विटामिन D का ध्यान रखें: इसकी कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच और उपचार कराएं।
- नियमित एक्सरसाइज करें: वॉकिंग, वजन सहने वाली एक्सरसाइज और मांसपेशियां मजबूत करने वाले व्यायाम फायदेमंद हो सकते हैं।
- ब्लड शुगर और थायरॉइड कंट्रोल रखें: पुरानी बीमारियों का सही इलाज हड्डियों की सेहत के लिए भी जरूरी है।
- गिरने से बचाव करें: बुजुर्गों को घर में फिसलन, खराब रोशनी और संतुलन से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
- दवाओं की समीक्षा करवाएं: लंबे समय से कोई दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से उसके संभावित असर के बारे में पूछें।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. अश्वनी मैचंद के अनुसार, हड्डियों की मजबूती का संबंध शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से भी है। डायबिटीज, थायरॉइड और दूसरी पुरानी बीमारियों के मरीजों में हड्डियों की सेहत का आकलन करते समय सिर्फ बोन डेंसिटी नहीं, बल्कि बीमारी की स्थिति, दवाओं और फ्रैक्चर के अन्य जोखिमों को भी देखना जरूरी है।
समय पर जांच, बीमारियों का सही इलाज, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधियां हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।
