What Is Melatonin In Hindi: क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शरीर रात को खुद-ब-खुद नींद के लिए तैयार क्यों हो जाता है? असल में इसके पीछे एक खास हार्मोन काम करता है - मेलाटोनिन। इसे अक्सर “स्लीप हार्मोन” कहा जाता है, लेकिन सच यह है कि मेलाटोनिन सिर्फ नींद ही नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का भी सुपरस्टार है। यह हार्मोन हमारे दिमाग की पीनियल ग्रंथि से अंधेरे में निकलता है और हमारी बॉडी की “जैविक घड़ी” यानी सर्केडियन रिदम को नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में मेलाटोनिन पर दुनियाभर में गहन रिसर्च हुई है, जिसने इसे और भी खास बना दिया है। नींद की गुणवत्ता सुधारने से लेकर इम्यूनिटी, एंटी-एजिंग और जेट लैग में राहत तक, मेलाटोनिन सेहत की चाबी बनकर उभरा है। आइए जानते हैं कि रिसर्च इसके बारे में क्या कहती है।
What Is Melatonin In Hindi
नींद का असली मैनेजर
मेलाटोनिन का सबसे बड़ा काम हमारी नींद-जागने की लय को सही रखना है। अमेरिका की नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अध्ययन में पाया गया कि 0.5 से 3 मिलीग्राम मेलाटोनिन सप्लीमेंट उन लोगों की नींद सुधार सकता है जिन्हें नींद आने में परेशानी होती है या जो जेट लैग से परेशान रहते हैं। यह हार्मोन नींद में होने वाले व्यवधान को कम करता है और गहरी व आरामदायक नींद दिलाता है।
जेट लैग और शिफ्ट वर्कर्स के लिए वरदान
आज के समय में लंबी हवाई यात्राएं और नाइट शिफ्ट्स आम हो गई हैं। ऐसे में स्लीप सायकल पूरी तरह बिगड़ जाता है। रिसर्च बताती है कि मेलाटोनिन सप्लीमेंट लेने से जेट लैग के लक्षण काफी हद तक कम हो सकते हैं और रात की शिफ्ट करने वाले लोगों को भी बेहतर नींद मिल सकती है।
एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर मेलाटोनिन
सिर्फ नींद ही नहीं, मेलाटोनिन शरीर को बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है। यह एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज करता है। ये वही फ्री रेडिकल्स हैं जो कैंसर, हृदय रोग और समय से पहले उम्र बढ़ने का कारण बनते हैं। 2020 के एक अध्ययन ने बताया कि मेलाटोनिन अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों से लड़ने में भी सहायक हो सकता है।
कोविड-19 और मेलाटोनिन की भूमिका
कोरोना महामारी के दौरान भी मेलाटोनिन चर्चा में रहा। शुरुआती शोधों ने सुझाव दिया कि यह हार्मोन इंफ्लेमेशन को कम कर सकता है और इम्यून सिस्टम को मॉड्यूलेट करता है। हालांकि यह कोविड का इलाज नहीं है, लेकिन सपोर्टिव थैरेपी के रूप में इसके फायदे देखे गए।
साइड इफेक्ट्स और सावधानियां
हालांकि मेलाटोनिन को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके साइड इफेक्ट्स जैसे सिरदर्द, चक्कर, दिन में नींद आना और मूड बदलना महसूस हो सकता है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और जो लोग पहले से दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
मेलाटोनिन को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाएं
अगर आप सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहते हैं, तो कुछ आसान आदतों से शरीर में मेलाटोनिन का स्तर प्राकृतिक रूप से बढ़ाया जा सकता है। रात को मोबाइल और लैपटॉप की नीली रोशनी से दूरी बनाएं, कमरे की रोशनी हल्की रखें, दिन में धूप जरूर लें और सोने से पहले कैफीन या हैवी मील से बचें।
मेलाटोनिन सिर्फ नींद का हार्मोन नहीं है, बल्कि यह शरीर की जैविक घड़ी का अहम हिस्सा है। यह नींद सुधारने के साथ-साथ इम्यूनिटी को मजबूत करता है, बीमारियों से बचाव में मदद करता है और शरीर को एक्टिव रखता है। अगर आप भी बेहतर नींद और सेहत चाहते हैं, तो मेलाटोनिन के महत्व को समझना जरूरी है।
Source: IANS
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
