वजन कम करने की कोशिश शुरू करते ही कई लोगों की थाली का खाना एकदम बदल जाता है। चावल दिखे तो मन में डर, घी दिखे तो कैलोरी की चिंता और केला सामने आए तो चीनी का ख्याल आने लगता है। सोशल मीडिया पर भी वेट लॉस फूड को लेकर इतनी अलग-अलग सलाह मिलती रहती है कि आखिर सही क्या है, यह समझना मुश्किल हो जाता है। खासकर भारतीय घरों के सामान्य खाने को कई बार बिना पूरी जानकारी के अनहेल्दी मान लिया जाता है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - साइनस क्या होता है? नाक बंद, सांस की दिक्कत से परेशान हैं तो ये आसान उपाय आएंगे काम
1. चावल को देखकर डरने की जरूरत नहीं
चावल को वजन बढ़ाने वाला भोजन मानना एक आम धारणा बन गई है। रुजुता दिवेकर के अनुसार, भारतीय थाली में चावल अक्सर दाल, सब्जी, कढ़ी या दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाता है। यानी भोजन सिर्फ चावल का कटोरा नहीं होता। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय अपनी पूरी थाली और खाने की मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी वाली बात हो सकती है।
2. घी दुश्मन नहीं, मात्रा मायने रखती है
डाइट शुरू होते ही घी सबसे पहले गायब हो जाता है। वीडियो में रुजुता दिवेकर ने घी को लेकर भी इसी सोच पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, घी में वसा और कुछ उपयोगी घटक होते हैं, इसलिए इसे बिल्कुल छोड़ देना जरूरी नहीं। रोटी, दाल या चावल में थोड़ी मात्रा में घी शामिल किया जा सकता है। बस यह याद रखें कि अच्छी चीज भी जरूरत से ज्यादा हो तो संतुलन बिगाड़ सकती है।
3. केला सिर्फ चीनी नहीं है
केले को देखकर केवल उसमें मौजूद प्राकृतिक मिठास के बारे में सोचना सही तस्वीर नहीं देता। केला फाइबर, विटामिन और खनिज भी देता है। रुजुता दिवेकर की बातों का मुख्य संदेश यही है कि किसी फल को सिर्फ उसकी मिठास के आधार पर खराब भोजन मान लेना ठीक नहीं। अगर केला आपकी रोज की थाली का हिस्सा है, तो उसे बिना वजह डरकर हटाने की जरूरत नहीं।
वजन घटाने के लिए किसी एक भोजन को विलेन बनाने के बजाय पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। खाने की मात्रा, फिजिकल एक्टिविटी, नींद, स्ट्रेस ये सभी मायने रखते हैं।
