Mouth Breathing Vs Nose Breathing: सांस लेना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिस पर हम शायद ही कभी ध्यान देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप ज्यादातर सांस नाक से लेते हैं या मुंह से? यह छोटी-सी आदत आपकी सेहत पर बड़ा असर डाल सकती है। कई लोग नाक बंद होने या व्यायाम के दौरान मुंह से सांस लेते हैं, जो सामान्य बात है। लेकिन अगर बिना किसी वजह के ज्यादातर समय मुंह से सांस ली जाए, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।
सांस मुंह से लेना चाहिए या नाक से?
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट एंडोस्कोपिक ईएनटी सर्जन और प्रवक्ता डॉ. के.वी.एस.एस.आर.के. शास्त्री बताते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में नाक से सांस लेना शरीर के लिए सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है। आइए जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और आपकी सेहत के लिए कौन सा तरीका बेहतर माना जाता है।
नाक सिर्फ सांस लेने का रास्ता नहीं
डॉ. के.वी.एस.एस.आर.के. शास्त्री के अनुसार, नाक का काम केवल हवा को शरीर के अंदर पहुंचाना नहीं है। नाक हवा में मौजूद धूल, एलर्जी पैदा करने वाले कण और कई तरह के कीटाणुओं को रोकने का काम करती है। साथ ही यह हवा को फेफड़ों तक पहुंचने से पहले गर्म और नम भी बनाती है, जिससे सांस की नलियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
वह बताते हैं कि नाक से सांस लेने पर शरीर नाइट्रिक ऑक्साइड भी बनाता है। यह एक प्राकृतिक गैस है, जो फेफड़ों में ऑक्सीजन के बेहतर उपयोग और श्वसन तंत्र के सामान्य कामकाज में मदद करती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ सामान्य स्थिति में हमेशा नाक से सांस लेने की सलाह देते हैं।
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मुंह से सांस लेने की आदत क्यों हो सकती है नुकसानदायक
डॉ. शास्त्री कहते हैं कि अगर कभी-कभार नाक बंद होने या कठिन व्यायाम के दौरान मुंह से सांस लेनी पड़े तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन लंबे समय तक मुंह से सांस लेना शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
उनके मुताबिक लगातार मुंह से सांस लेने से मुंह सूखना, सांस से बदबू आना, गले में खराश, नींद का बार-बार टूटना और खर्राटों की समस्या हो सकती है। इसके अलावा दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है। बच्चों में यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो चेहरे और जबड़े के विकास तथा दांतों की सही बनावट पर भी असर पड़ सकता है।
अगर हमेशा मुंह से सांस लेते हैं तो जान लें वजह
डॉ. शास्त्री के अनुसार, लगातार मुंह से सांस लेना अपने आप में बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके पीछे एलर्जी, लंबे समय तक नाक बंद रहना, नाक की हड्डी का टेढ़ा होना (डेविएटेड नेजल सेप्टम), साइनस इंफेक्शन, बढ़े हुए एडेनॉइड्स या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
वह कहते हैं कि केवल सांस लेने की आदत बदलने की कोशिश करने से समस्या हल नहीं होगी। सबसे जरूरी है कि इसकी असली वजह का पता लगाया जाए और उसी का इलाज किया जाए।
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इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर आप सुबह उठते ही मुंह सूखा महसूस करते हैं, तेज खर्राटे लेते हैं, दिनभर नींद या थकान महसूस होती है या जागते समय भी अक्सर मुंह से सांस लेते हैं, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. शास्त्री सलाह देते हैं कि ऐसे लक्षण दिखने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। जरूरत के अनुसार एलर्जी का इलाज, दवाएं, जीवनशैली में बदलाव या आगे की जांच की जा सकती है।
डॉक्टर की क्या है सलाह
डॉ. के.वी.एस.एस.आर.के. शास्त्री कहते हैं, "एक स्वस्थ नाक ही अच्छी सांस लेने की पहली शर्त है। अगर आपकी नाक से आराम से सांस ली जा सकती है, तो सामान्य परिस्थितियों में हमेशा नाक से ही सांस लेनी चाहिए। मुंह से सांस लेने की आदत को नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।"
यह भी रखें ध्यान
सांस लेना अपने आप होने वाली प्रक्रिया है, लेकिन उसका तरीका आपकी सेहत पर असर डाल सकता है। वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो सामान्य परिस्थितियों में नाक से सांस लेना शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। अगर आपको लगता है कि आप अधिकतर समय मुंह से सांस लेते हैं या इससे जुड़े लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना देरी किए ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
