Indian BMI Guidelines: BMI या शरीर द्रव्यमान सूचकांक, एक ऐसी माप है जो यह निर्धारित करती है कि किसी व्यक्ति का वजन उसकी ऊंचाई के अनुपात में स्वस्थ है या नहीं। यह माप विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया है, लेकिन भारत में इसके मानक कुछ अलग हैं। भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह समझा है कि भारतीय जनसंख्या में कम वजन पर भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। भारत में BMI की सामान्य सीमा 18.5 से 22.9 है, जबकि 23 से 24.9 को अधिक वजन और 25 से ऊपर को मोटापा माना जाता है। ये मानक स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बेहतर पहचान और रोकथाम में मदद करते हैं। भारत में बढ़ती मोटापे की दर और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने के लिए ये दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण हैं।
भारत के नए BMI नियम
रोगों की पहचान होगी आसान
जो एस्टर व्हाइटफील्ड अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटोलॉजी के प्रमुख सलाहकार, डॉ. नरेंद्र बी.एस. बताते हैं कि यह आवश्यक है कि भारतीय स्वास्थ्य पेशेवर इन स्थानीय मानकों का पालन करें ताकि वे मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों के मामलों की पहचान और प्रबंधन कर सकें। भारत में औसत BMI 21 से 23 के बीच है, जो वैश्विक सामान्य सीमा के अनुरूप प्रतीत होता है। लेकिन अगर हम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के अंतर को देखें, तो स्थिति जटिल हो जाती है। शहरी क्षेत्रों में लोग अक्सर अस्वस्थ जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड के सेवन के कारण अधिक वजन के शिकार होते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या भी बनी हुई है।
मोटापा को कंट्रोल करना है जरूरी
अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में भारतीय मानक को इसीलिए स्थापित किया गया है क्योंकि दक्षिण एशियाई लोग आमतौर पर कम वजन पर भी उच्च वसा वाले आंतरिक अंगों में वसा जमा कर लेते हैं, जो स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए, भारतीय स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों को इस तरह से तैयार किया गया है कि वे स्थानीय जनसंख्या की विशेषताओं को ध्यान में रखें। भारत में बढ़ती मोटापे की समस्या, विशेषकर बच्चों और युवाओं में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 24 प्रतिशत भारतीय महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष या तो अधिक वजन वाले हैं या मोटे हैं। इसके अलावा, बच्चों में मोटापे की दर भी चिंताजनक स्तर तक पहुँच गई है।
कैसे सेहत रहेगी फिट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल चिकित्सा हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार भी इस दिशा में कई पहल कर रही है, जैसे 'फिट इंडिया मूवमेंट' और 'खेलो इंडिया'। इस प्रकार, भारत में BMI के मानकों का स्थानीयकरण स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर परिणाम लाने में सहायक हो सकता है। स्वास्थ्य मानकों को जनसंख्या-विशिष्ट जोखिमों को ध्यान में रखते हुए तैयार करना आवश्यक है ताकि देश की स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।
