Is Copper Bottle Water Good For Everyone: आजकल हम देखते हैं कि तांबे की बोतल में पानी पीना लोगों के हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है। कई लोग सुबह उठते ही तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते हैं, तो कुछ पूरे दिन इसी बोतल का इस्तेमाल करते हैं। सोशल मीडिया पर इसे पाचन बेहतर करने, इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने जैसे कई दावों से जोड़ा जाता है। लेकिन क्या ये सभी बातें वैज्ञानिक रूप से सही हैं? इसका जवाब है - हर दावा नहीं। वैज्ञानिक संस्थाओं और रिसर्च के अनुसार, तांबा (कॉपर) शरीर के लिए जरूरी मिनरल जरूर है, लेकिन इसकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि तांबे की बोतल का पानी कब फायदेमंद हो सकता है, किन लोगों को इससे बचना चाहिए और इसका सही इस्तेमाल क्या है।
तांबे के बर्तन में रखा पानी सेहत के लिए वरदान या करता है नुकसान
शरीर को रोजाना कितने तांबे की जरूरत होती है
बता दें कि तांबा एक जरूरी मिनरल (Trace Mineral) है, जिसकी शरीर को बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, आयरन के सही उपयोग, नर्वस सिस्टम और कई एंजाइमों के सामान्य कामकाज में मदद करता है।
एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना लगभग 0.9 मिलीग्राम (900 माइक्रोग्राम) तांबे की जरूरत होती है। इतनी मात्रा में तांबा हमारे शरीर को आमतौर पर दाल, मेवे, बीज, साबुत अनाज, मशरूम, कोको और समुद्री भोजन जैसे सामान्य फूड्स से आसानी से मिल जाता है। यानी केवल तांबे की कमी पूरी करने के लिए हर किसी को तांबे की बोतल का पानी पीने की जरूरत नहीं होती।
तांबे की बोतल का पानी कैसे काम करता है
तांबे की बोतल के फायदे की सबसे बड़ी वजह उसका ऑलिगोडायनामिक प्रभाव (Oligodynamic Effect) माना जाता है। इसका मतलब है कि तांबे की सतह कुछ प्रकार के बैक्टीरिया की संख्या कम करने की क्षमता रखती है। एप्लाइड एंड एनवायरनमेंटल माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित शोध बताते हैं कि यदि साफ तांबे के बर्तन में सामान्य पानी को करीब 8 से 12 घंटे रखा जाए, तो कुछ सामान्य रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया की संख्या कम हो सकती है।
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हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि तांबे की बोतल हर तरह के वायरस या कीटाणु खत्म कर देती है या दूषित पानी को पूरी तरह सुरक्षित बना देती है। अगर पानी पहले से ही अशुद्ध है, तो केवल तांबे की बोतल उसे पीने योग्य नहीं बना सकती। इसलिए इसे पानी शुद्ध करने का विकल्प नहीं, बल्कि एक सामान्य जीवनशैली की आदत के रूप में ही देखना चाहिए।
कैसे काम करता है तांबे के बर्तन में रखा पानी
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किन लोगों को तांबे के बर्तन में रखा पानी नहीं पीना चाहिए
ध्यान रखें कि हर व्यक्ति के लिए तांबे की बोतल का पानी एक जैसा उपयुक्त नहीं होता है। विल्सन डिजीज (Wilson Disease) से पीड़ित लोगों के शरीर में अतिरिक्त तांबा बाहर नहीं निकल पाता और धीरे-धीरे लिवर, दिमाग और दूसरे अंगों में जमा होने लगता है। ऐसे लोगों को अतिरिक्त तांबे से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा, जिन लोगों को ऐसी गंभीर लिवर बीमारी है जिसमें डॉक्टर ने तांबे का सेवन सीमित रखने को कहा हो, उन्हें भी नियमित रूप से तांबे की बोतल का पानी पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। यदि आपके घर में ऐसा आरओ (RO) वॉटर प्यूरीफायर लगा है, जिसमें कॉपर एनरिचमेंट तकनीक (Copper Enrichment Technology) पहले से मौजूद है, तो अलग से तांबे की बोतल का नियमित इस्तेमाल शुरू करने से पहले भी विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। इसका कारण यह है कि हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है।
क्या ज्यादा तांबा नुकसान पहुंचा सकता है?
इसका जवाब है- हां, जरूरत से ज्यादा तांबा शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (U.S. EPA) दोनों मानते हैं कि ज्यादा मात्रा में तांबे का सेवन स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। हालांकि किसी तांबे की बोतल में रखे पानी में कितना तांबा घुलेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे - पानी का pH, तापमान, बोतल की क्वोलिटी और पानी कितनी देर तक रखा गया है। इसलिए हर स्थिति में एक जैसी मात्रा नहीं होती।
अगर शरीर में बहुत ज्यादा तांबा पहुंच जाए, तो कॉपर टॉक्सिसिटी (Copper Toxicity) के शुरुआती लक्षणों में मतली, उल्टी, पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। यही वजह है कि किसी भी अच्छी चीज का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता।
तांबे की बोतल का सही इस्तेमाल क्या है?
तांबे की बोतल में हमेशा सामान्य पीने का पानी ही रखें। नींबू पानी, सिरका, फलों का रस या दूसरे अम्लीय (Acidic) पेय इसमें नहीं रखने चाहिए, क्योंकि अम्लीय तरल पदार्थ तांबे को ज्यादा मात्रा में घोल सकते हैं।
बोतल के अंदर समय के साथ हरे या काले रंग की एक परत बन सकती है, जिसे पैटीना (Patina) कहा जाता है। यह तांबे के ऑक्सीकरण की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए बोतल को समय-समय पर साफ करना जरूरी है, ताकि उसकी सतह साफ बनी रहे। साथ ही पूरे दिन केवल तांबे की बोतल का पानी पीना भी जरूरी नहीं है। सामान्य स्टील या कांच की बोतल का इस्तेमाल भी पूरी तरह सुरक्षित और अच्छा विकल्प है।
निष्कर्ष
तांबे की बोतल का पानी कोई चमत्कारी उपाय नहीं है, लेकिन सही तरीके और सीमित मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जाए तो यह एक सामान्य और सुरक्षित आदत हो सकती है। वैज्ञानिक शोध यह जरूर बताते हैं कि तांबे की सतह में कुछ रोगाणुरोधी (Antimicrobial) गुण होते हैं, लेकिन इससे जुड़े कई लोकप्रिय दावे - जैसे शरीर का डिटॉक्स होना, इम्युनिटी तेजी से बढ़ना या हर बीमारी से बचाव अभी मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों से साबित नहीं हुए हैं। इसलिए किसी भी वायरल हेल्थ ट्रेंड को आंख बंद करके अपनाने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर फैसला लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
संदर्भ:
National Institutes of Health (NIH) – Office of Dietary Supplements. Copper: Fact Sheet for Health Professionals (दैनिक जरूरत, शरीर में भूमिका और सुरक्षित सेवन की जानकारी)
World Health Organization (WHO). Copper in Drinking-water: Background document for Guidelines for Drinking-water Quality (पेयजल में तांबे की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रभाव)
U.S. Environmental Protection Agency (EPA). Lead and Copper Rule (सार्वजनिक पेयजल में कॉपर के लिए Action Level)
Grass G, Rensing C, Solioz M. Metallic Copper as an Antimicrobial Surface. Applied and Environmental Microbiology. (तांबे की रोगाणुरोधी क्षमता)
Santo CE et al. Bacterial Killing by Dry Metallic Copper Surfaces. Applied and Environmental Microbiology. (तांबे की सतह पर बैक्टीरिया के कम होने से जुड़ा शोध)
