डिमेंशिया की पहचान में लग जाते हैं साढ़े 3 साल, लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज करते हैं लोग: स्टडी

एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि डिमेंशिया के लक्षण दिखने के बावजूद इसका निदान औसतन 3.5 साल बाद होता है। कम उम्र में शुरू होने वाले डिमेंशिया और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में तो पहचान और भी देर से होती है। विशेषज्ञों ने समय पर डायग्नोसिस और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई है।

डिमेंशिया की शुरुआत में व्यक्ति को याददाश्त कमजोर होने लगती है, शब्दों को याद करने में दिक्कत होती है, भ्रम की स्थिति बनी रहती है और मूड या व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकते हैं। लेकिन अक्सर इन लक्षणों को लोग उम्र बढ़ने से जुड़ी सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

Delayed diagnosis of dementia

Delayed diagnosis of dementia

कम उम्र में डिमेंशिया का पता लगाने में और अधिक देरी

यह शोध 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ जेरियाट्रिक साइकियाट्री' में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया कि खासकर कम उम्र में डिमेंशिया शुरू होने और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसे मामलों में तो निदान में और भी ज्यादा देरी हो जाती है - औसतन 4.1 साल तक। कुछ मामलों में यह समय और भी लंबा हो सकता है।

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