Israel Lebanon Ceasefire : इजरायल और लेबनान के मिलिशिया समूह हिज्बुल्ला के बीच सीजफायर हो गया है। इस सीजफायर के तहत अगले 60 दिनों तक कोई पक्ष एक दूसरे पर हमला नहीं करेगा। इस दौरान दक्षिणी लेबनान से इजरायल अपने सैनिक वापस बुलाएगा और हिज्बुल्ला उत्तरी इजरायल में हमले नहीं करेगा। यह सीजफायर अमेरिका और फ्रांस की कोशिशों का नतीजा है। कहा जा रहा है कि इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच हुए इस समझौते के बाद इलाके में शांति आएगी। इस समझौते के बाद मध्य पूर्व में युद्ध का एक मोर्चा फिलहाल बंद हो गया है। यह अच्छी खबर है। दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजरायल के लोग खुश हैं, संघर्ष और युद्ध के चलते जो लोग अपने घरों से बेदखल हुए थे और बीते करीब 14 महीनों से शरणार्थी की तरह जिंदगी गुजार रहे थे, वे आपस अपने घरों की तरफ लौटने लगे हैं।
इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच हुआ सीजफायर।
हमास के हमलों में मारे गए 1200 इजरायली
लेकिन सवाल यह है कि इजरायल और हमास के बीच बिना युद्ध बंद हुए क्या इस क्षेत्र में शांति आ पाएगी। हमें यह याद रखना होगा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर भीषण हमला और करीब 1200 लोगों का नरसंहार किया। इसके अगले दिन यानी आठ अक्टूबर को बिना किसी उकसावे के हिज्बुल्ला ने उत्तरी इजरायल में रॉकेट दागने शुरू कर दिए। हिज्बुल्ला के लगातार हमलों की वजह से उत्तरी इजरायल से करीब 60 हजार नागरिकों को इजरायल में ही सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी। तब से इजरायल फिलिस्तीन में हमास और लेबनान में हिज्बुल्ला से लड़ता आया है।
यह भी पढ़ें- विदेश नीति के मोर्चे पर जो बाइडेन ने खींची बड़ी लकीर, जाते-जाते क्या गाजा में भी लागू कराएंगे सीजफायर?
27 सितंबर को मारा गया हिज्बुल्ला चीफ हसन नसरल्लाह
हमास के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई जहां लगातार चलती रही वहीं, हिज्बुल्ला पर वह रुक-रुक के हमले करता रहा। बीते 17 सितंबर को इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के पेजर में धमाके किए। इसमें करीब 39 लोगों की जान गई। इसके बाद इजरायल ने हिज्बुल्ला पर बड़े हमले करने शुरू किए। गत 27 सितंबर को इजरायल ने अपने हवाई हमले में हिज्बुल्ला के चीफ हसन नसरल्लाह, उसके करीबियों और टॉप कमांडरों को मार दिया। बेरूत और उसके आस-पास हिज्बुल्ला के जितने भी ठिकाने थे, उन्हें अपने हवाई हमलों में नष्ट किया।
इजरायल के खिलाफ टिका है हिज्बुल्ला का अस्तित्व
एक्सपर्ट मानते हैं कि इजरायल के इन हमलों ने हिज्बुल्ला की कमर तोड़ दी है। उसके लड़ने की ताकत काफी कमजोर हो गई है। इजरायल के सामने उसका टिकना मुश्किल हो गया था। यही नहीं, ईरान और अन्य देशों से हिज्बुल्ला को हथियार और पैसे मिलने एक तरह से बंद हो गए थे। ऐसे में यह सीजफायर मजबूरी का नतीजा है। इस सीजफायर से हिज्बुल्ला को इजरायल के हमलों से फौरी तौर पर राहत मिलेगी लेकिन आगे वह अपनी ताकत नहीं बढ़ाएगा और इजरायल के खिलाफ मोर्चा नहीं खोलेगा, इसमें संदेह है। क्योंकि हिज्बुल्ला का अस्तित्व ही इजरायल के खिलाफ हमलों पर टिका है। दूसरा, इस सीजफायर में हमास और फिलिस्तीन को लेकर कुछ नहीं कहा गया है।
मौजूदा सीजफायर से हिज्बुल्ला को समय मिलेगा
हमास और हिज्बुल्ला दोनों का डीएनए करीब-करीब एक है। हमास पर इजरायल के हमले यदि जारी रहते हैं तो क्या हिज्बुल्ला शांत बैठा रहेगा? जाहिर है कि नहीं। वह इजरायल पर फिर से रॉकेट हमला शुरू कर सकता है। हिज्बुल्ला और इजरायल की अदावत दशकों पुरानी है। दोनों एक दूसरे पर वार पलटवार करते आए हैं। हिज्बुल्ला के हमलों के बाद इजरायल उसके खिलाफ कई बार अभियान चला चुका है लेकिन इस बार उसने उसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इजरायल के लगातार हमलों से उसकी ताकत और सांगठनिक ढांचा एवं संरचना कमजोर हुए हैं। ऐसे में उसका पूरा ध्यान अभी इसे ठीक करने पर होगा। इसके लिए उसे समय चाहिए। मौजूदा सीजफायर उसे यह समय देने जा रहा है।
