केवल स्पेन ने NATO के बढ़े हुए रक्षा बजट से क्यों बनाई दूरी? अलग रुख से ट्रंप भी हैरान, दे दी चेतावनी

नाटो जिसमें 32 देश हैं, इनमें से एक देश ऐसा है जो इसके लिए राजी नहीं हुआ है। वह देश स्पेन है। स्पेन ने साफ तौर पर कहा है कि अपनी राजनीतिक एवं आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए वह नाटो का रक्षा बजट नहीं बढ़ा सकता। उसने अपने पैर पीछे खींच लिए हैं। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उसकी आलोचना और कारोबार में नुकसान उठाने की धमकी दी है। दरअसल, नाटो के देश वैश्विक खतरों खासतौर पर रूस को एक बड़े खतरे के रूप में देख रहे हैं।

NATO Defence Budget : उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की समिट हाल ही में हेग में संपन्न हुई है। यह बैठक इस मायने में काफी महत्वपूर्ण है कि इसके सदस्य देशों ने अपने सकल घरेलू उत्पाद, यानी अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा बजट पर खर्च करने के लिए तैयार हो गए हैं। देश नाटो का रक्षा बजट साल 2035 तक पांच प्रतिशत करने पर सहमत हुए हैं। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी खुश हैं लेकिन नाटो जिसमें 32 देश हैं, इनमें से एक देश ऐसा है जो इसके लिए राजी नहीं हुआ है। वह देश स्पेन है। स्पेन ने साफ तौर पर कहा है कि अपनी राजनीतिक एवं आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए वह नाटो का रक्षा बजट नहीं बढ़ा सकता। उसने अपने पैर पीछे खींच लिए हैं। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उसकी आलोचना और कारोबार में नुकसान उठाने की धमकी दी है।

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हेग में हुई नाटो देशों की बैठक।

दरअसल, नाटो के देश वैश्विक खतरों खासतौर पर रूस को एक बड़े खतरे के रूप में देख रहे हैं। जाहिर है कि स्पेन के इस कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुश हो सकते हैं। भौगोलिक रूप से यदि देखें तो स्पेन यूरोप का हिस्सा तो है लेकिन यह रूस से बहुत दूर है। यह अफ्रीकी महाद्वीप से ठीक ऊपर है। रूस यदि यरोप पर भविष्य में हमला करता भी है तो स्पेन तक आने में उसे बहुत वक्त लगेगा। रूस और स्पेन के बीच दो-चार देशों का फासला नहीं बल्कि दर्जन भर से ज्यादा देशों का है।

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