Mock Drill in India: भारत में बुधवार यानि कि 7 मई को पूरे देश में एक मॉक ड्रिल होना है। इस मॉक ड्रिल का आदेश केंद्रीय गृहमंत्रालय यानि कि अमित शाह के मंत्रालय ने दिया है। यह ड्रिल देश के सभी राज्यों में होगा, इस मॉक ड्रिल में आम नागरिकों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि जंग के दौरान वो सतर्क रहें और सुरक्षित रहें। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह से भारत ने आक्रमण रूख अपनाया है, उससे पाकिस्तान में खौफ है कि भारत कभी भी हमला कर सकता है। भारत साफ कर चुका है आतंकियों और उनके आकाओं को सजा मिलेगी। इस मॉक ड्रिल को इसी तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह मॉक ड्रिल आम मॉक ड्रिल नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाली किसी तैयारी का हिस्सा है।
7 मई को देशभर में होगी मॉक ड्रिल
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मॉक ड्रिल के लिए सरकार की तैयारी
सरकार के आदेश के अनुसार देश के सभी राज्यों में मॉक ड्रिल होना है। इस मॉक ड्रिल के लिए दिल्ली में मीटिंग्स का दौर चल रहा है। देश की कई एजेंसियों को इसमें शामिल किया गया है। 244 सामरिक प्रतिष्ठा और सीमावर्ती क्षेत्र इस मीटिंग के लिए खास तौर पर शामिल किए गए हैं। यह बैठक देश की सुरक्षा और आपदा से निपटने की क्षमताओं को परखने और सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मॉक ड्रिल के तहत महत्वपूर्ण गतिविधियां की जाएंगी। इस दौरान एयर रेड वार्निंग सायरनों का संचालन होगा। यह बड़े खतरे और दुश्मन की गतिविधियों को लेकर अलर्ट जारी करने से जुड़ा कदम है। नागरिकों और छात्रों को संभावित हमलों की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक नागरिक सुरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्रैश ब्लैकआउट की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत दुश्मन की हवाई निगरानी या हमले से शहरों और ढांचों को छिपाने के लिए आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।
देशभर में होगा मॉक ड्रिल
मॉक ड्रिल में क्या-क्या
- मॉक ड्रिल के दौरान किए जाने वाले उपायों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन का संचालन, नागरिकों को ‘किसी भी हमले’ की सूरत में खुद को बचाने के लिए सुरक्षा पहलुओं पर प्रशिक्षण देना और बंकरों एवं खाइयों की साफ-सफाई शामिल है।
- अन्य उपायों में दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय, महत्वपूर्ण संयंत्रों और प्रतिष्ठानों की रक्षा तथा निकासी योजनाओं को अद्यतन करना एवं उनका पूर्वाभ्यास करना शामिल है।
- मॉक ड्रिल में वायुसेना के साथ हॉटलाइन और रेडियो-संचार लिंक का संचालन, नियंत्रण कक्षों और छाया नियंत्रण कक्षों की कार्यक्षमता का परीक्षण भी शामिल है।
- मॉक ड्रिल का आयोजन गांव स्तर तक करने की योजना बनाई गई है। इस अभ्यास का उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारी का आकलन करना और उसे बढ़ाना है।’
- मॉक ड्रिल में जिला नियंत्रकों, विभिन्न जिला अधिकारियों, नागरिक सुरक्षा ‘वार्डन’, स्वयंसेवकों, होमगार्ड (सक्रिय और रिजर्व स्वयंसेवक), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), नेहरू युवा केंद्र संगठन (एनवाईकेएस), कॉलेज और स्कूली छात्रों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य लोगों को युद्ध या आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करना है। इसमें वास्तविक युद्ध या आपातकाल की स्थितियों लोगों के सामने उत्पन्न की जाती हैं, ताकि लोग उस परिस्थिति में कैसे प्रतिक्रिया दें और सुरक्षित रह सकें, यह समझ सकें।
1. आपातकालीन स्थितियों का अभ्यास
- यह अभ्यास युद्ध, आतंकवाद, बम हमले या प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों के लिए होता है। इस दौरान लोग यह सीखते हैं कि ऐसी स्थितियों में क्या करना चाहिए।
- मॉक ड्रिल के दौरान, जनता को सुरक्षित स्थलों (जैसे बंकर या शेल्टर) का पता चलता है, जहां वे जा सकती हैं जब खतरा महसूस हो।
- यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि संकट के समय लोग एक-दूसरे से संपर्क कर सकें और आवश्यक सूचना प्राप्त कर सकें।
- पुलिस, फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और अन्य आपातकालीन सेवाओं का समन्वय इस ड्रिल में होता है ताकि वे जल्दी और प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
- मॉक ड्रिल यह भी सुनिश्चित करता है कि जनता को ऐसी परिस्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया करनी चाहिए, जैसे कि शांति बनाए रखना, डर को नियंत्रित करना, और सटीक दिशा-निर्देशों का पालन करना।
हमले के दौरान बचने की दी जाएगी ट्रेनिंग (प्रतीकात्मक फोटो- @Mate AI)
पिछली बार तोड़ दिया था पाकिस्तान
रिपोर्ट्स के अनुसार देश में पिछली बार ऐसी मॉक ड्रिल 1971 के जंग के दौरान हुई थी। तब भारत ने बांग्लादेश की आजादी के लिए पाकिस्तान के साथ जंग किया था। पहले पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला था, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान को ऐसे खदेड़ा कि बांग्लादेश तो आजाद हुआ ही, साथ ही पाकिस्तान के कई इलाकों पर भी भारत का कब्जा हो गया था और पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था।
