Bunkers on India Pakistan Border: भारत पाकिस्तान के बीच कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से बेगद तनाव का माहौल है वहीं भारत पाकिस्तान सीमा पर बंकरों (Bunkers on India Pakistan Border) की सफाई और मरम्मत आदि की जा रही है, ऐसा इसलिए कि युद्ध होने की स्थिति में ये बंकर बेहद काम आयेंगे।
जानिए कैसे होते हैं ये बंकर...
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव से बार्डर के सीमावर्ती गांवों में दहशत है यहां के लोग डर के साए में जी रहे हैं युद्ध होने की स्थिति वो अपनी जान बचाने के उपायों पर काम कर रहे हैं, इनमें से अहम है सीमा पर बंकर, (Bunkers on Border) जी हां ये वो स्थान है कि जहां पर वो आपात स्थिति (Emergency) में खुद को और अपने परिवार को महफूज रख सकते हैं।
कैसे होते हैं बंकर (What are Bunkers like)
सीमा पर बंकर (Bunkers at the border) एक रक्षात्मक संरचना है जिसका इस्तेमाल लोगों और महत्वपूर्ण उपकरणों को गिरने वाले बमों, तोपखाने या अन्य खतरों से बचाने के लिए किया जाता है वहीं इनका इस्तेमाल विभिन्न युद्धों में हथियारों के भंडारण, कमांड और नियंत्रण केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं के लिए किया गया है, शीत युद्ध में बंकरों का उपयोग परमाणु हमलों से सुरक्षित रहने के लिए किया गया था।
सीमा पर बंकरों का क्या है महत्व
बंकरों को दुश्मन के हमलों से होने वाली क्षति को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है बता दें कि बंकर एक ऐसा संरचना है जो सैनिकों और उपकरणों को दुश्मन के हमलों से सुरक्षित रख सकता है। बंकर एक आश्रय के रूप में कार्य करता है, जो बमबारी और अन्य खतरों से सुरक्षित रहने में मदद करता है।
सीमा पर बंकर कितनी तरीके के जान लें-
- भूमिगत बंकर :- ये बंकर जमीन के नीचे बनाए जाते हैं और इन्हें दुश्मन के हमलों से अधिक सुरक्षित माना जाता है इसलिए ये ज्यादा चलन में हैं
- कंक्रीट बंकर :- ये बंकर सामान्यतः कंक्रीट से बनाए जाते हैं और इन्हें जमीन में या जमीन के ऊपर बनाया जा सकता है
बंकरों में ये चीजें हैं अहम
कहा जाता है कि बंकर का दरवाजा कम से कम दीवारों जितना मजबूत होना चाहिए, लंबे समय तक रहने वाले बंकरों में, बड़ी मात्रा में वेंटिलेशन या एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि लोगों को सांस आराम से मिल सके।
कहां से आया बंकर का ख्याल
बंकर शब्द की उत्पत्ति स्कॉटिश शब्द 'बेंच, सीट' के रूप में हुई है, जिसे 1758 में दर्ज किया गया था, साथ ही संक्षिप्त बंक 'स्लीपिंग बर्थ' के रूप में भी। इस शब्द की उत्पत्ति संभवतः स्कैंडिनेवियाई मूल की है: पुराने स्वीडिश बंके का अर्थ है 'जहाज के माल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बोर्ड', 19वीं शताब्दी में यह शब्द किसी घर में कोयले के भंडार या जहाज में डेक के नीचे के भंडार का वर्णन करने के लिए आया।
यानी कहा जा सकता है कि सीमा पर बंकर रक्षात्मक संरचनाएं हैं जो सैनिकों और उपकरणों को दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए उपयोग की जाती हैं इनका उपयोग विभिन्न युद्धों में किया गया है और आगे भी होता रहेगा।
