2060 तक 3 गुना बढ़ेगी परमाणु ऊर्जा की मांग! क्या है AI, डेटा सेंटर और न्यूक्लियर पावर का वो कनेक्शन जो लिखेगा बदलाव की नई कहानी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बताया कि 2060 तक दुनिया में परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल तीन गुना से अधिक बढ़ जाएगा। जानिए कैसे AI और डेटा सेंटर बदल रहे हैं एनर्जी सेक्टर।

सोचिए, क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आपके स्मार्टफोन पर सेकंडों में जवाब देने वाले डेटा सेंटर दुनिया के बिजली ग्रिड को ठप कर सकते हैं? जी हां, जिस तरह से दुनिया में तकनीक की रफ्तार बढ़ रही है, बिजली की खपत में वैसा उछाल इतिहास में कभी नहीं देखा गया। लेकिन सवाल यह है कि प्रदूषण मुक्त और चौबीसों घंटे मिलने वाली इतनी बड़ी मात्रा में बिजली आएगी कहां से? संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने एक ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने पूरी दुनिया के नीति निर्माताओं का ध्यान खींच लिया है। ग्रॉसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2060 तक वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा का उपयोग तीन गुनी से भी अधिक सीमा तक बढ़ सकता है। IAEA की वार्षिक रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत करते हुए ग्रॉसी ने दुनिया के सामने परमाणु ऊर्जा की बदलती तस्वीर, तकनीकी क्रांति और दुनिया के सबसे खतरनाक परमाणु हॉटस्पॉट्स यानी ईरान, उत्तर कोरिया, यूक्रेन और सीरिया का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।

AI Data Centers and Nuclear Power connection explained

UN में बोले IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी

AI और डेटा सेंटरों की 'बिजली की भूख' बनी मुख्य वजह

आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक दुनिया भर की दिग्गज टेक कंपनियां और देश न्यूक्लियर एनर्जी की तरफ भाग रहे हैं, ग्रॉसी के मुताबिक, इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं।

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