सोचिए, क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आपके स्मार्टफोन पर सेकंडों में जवाब देने वाले डेटा सेंटर दुनिया के बिजली ग्रिड को ठप कर सकते हैं? जी हां, जिस तरह से दुनिया में तकनीक की रफ्तार बढ़ रही है, बिजली की खपत में वैसा उछाल इतिहास में कभी नहीं देखा गया। लेकिन सवाल यह है कि प्रदूषण मुक्त और चौबीसों घंटे मिलने वाली इतनी बड़ी मात्रा में बिजली आएगी कहां से? संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने एक ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने पूरी दुनिया के नीति निर्माताओं का ध्यान खींच लिया है। ग्रॉसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2060 तक वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा का उपयोग तीन गुनी से भी अधिक सीमा तक बढ़ सकता है। IAEA की वार्षिक रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत करते हुए ग्रॉसी ने दुनिया के सामने परमाणु ऊर्जा की बदलती तस्वीर, तकनीकी क्रांति और दुनिया के सबसे खतरनाक परमाणु हॉटस्पॉट्स यानी ईरान, उत्तर कोरिया, यूक्रेन और सीरिया का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।
UN में बोले IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी
AI और डेटा सेंटरों की 'बिजली की भूख' बनी मुख्य वजह
आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक दुनिया भर की दिग्गज टेक कंपनियां और देश न्यूक्लियर एनर्जी की तरफ भाग रहे हैं, ग्रॉसी के मुताबिक, इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स: AI मॉडल को ट्रेन करने और विशाल डेटा सेंटरों को लगातार चलाने के लिए अरबों गीगावाट बिजली की जरूरत होती है।
टेक कंपनियों का 'कार्बन-फ्री' संकल्प: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी वैश्विक टेक कंपनियां अब ऐसे ऊर्जा स्रोतों की तलाश में हैं जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं और बिना किसी रुकावट के 24x7 बिजली दे सकें।
ऊर्जा सुरक्षा: दुनिया भर के देश अब जीवाश्म ईंधन यानी कोयला और तेल पर अपनी निर्भरता कम करके अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करना चाहते हैं।
ग्रॉसी ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2025 में 30 से अधिक देशों में 400 से अधिक चालू परमाणु रिएक्टरों ने दुनिया की 10% बिजली और एक चौथाई कम-कार्बन बिजली का उत्पादन किया है। वर्तमान में दुनिया भर में 60 से अधिक नए परमाणु रिएक्टर निर्माणाधीन हैं और भविष्य में इसकी क्षमता के अनुमानों में नाटकीय रूप से भारी बढ़ोतरी हुई है। राफेल ग्रॉसी कहते हैं कि परमाणु ऊर्जा सौर ऊर्जा के समान ही स्वच्छ है और सुरक्षा के मानकों पर यह अन्य सभी विकल्पों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है।
न्यूक्लियर एनर्जी की बढ़ेगी जरूरत
दुनिया के परमाणु हॉटस्पॉट्स पर ग्रॉसी के 4 बड़े खुलासे
शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा की वकालत करने के साथ-साथ IAEA प्रमुख ने दुनिया के उन संवेदनशील इलाकों का जिक्र किया जहां परमाणु खतरे मंडरा रहे हैं:
1. ईरान (Iran):
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उन्होंने कहा कि राजनयिक समझौते के लिए आवश्यक तकनीकी काम पूरा कर लिया गया है। ग्रॉसी ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द वार्ता की मेज पर लौटें ताकि IAEA के निरीक्षकों को तेहरान में त्वरित वापसी की अनुमति मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि IAEA के सत्यापन के बिना कोई भी समझौता टिकाऊ नहीं हो सकता।
2. उत्तर कोरिया (North Korea):
किम जोंग उन के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम पर चेतावनी देते हुए ग्रॉसी ने कहा कि उत्तर कोरिया में IAEA की कोई निगरानी नहीं है। यह इस बात का एक कड़वा और गंभीर याद दिलाती है कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कर रेड लाइन्स पार की जाती हैं, तो उसके परिणाम कितने भयानक होते हैं।
3. यूक्रेन का जापोरिजिया प्लांट:
यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच यूरोप के सबसे बड़े जापोरिजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र' की स्थिति को उन्होंने बेहद अनिश्चित और खतरनाक बताया। ग्रॉसी ने कहा कि लगातार होती बिजली कटौती, बैकअप डीजल की कमी और आसपास जारी सैन्य गतिविधियां संयंत्र और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सीधा खतरा बनी हुई हैं।
4. सीरिया पर सकारात्मक मोड़ (Syria):
एक सकारात्मक मोर्चे पर, ग्रॉसी ने बताया कि सीरिया की अंतरिम सरकार (राष्ट्रपति अहमद अल-शरा) के साथ जुड़ने के बाद लगभग दो दशक से अनसुलझे पड़े सीरियाई परमाणु मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि बशर अल-असद के दौर में एक गुप्त परमाणु रिएक्टर बनाया जा रहा था, जिसका इस्तेमाल संभवतः परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय सामग्री बनाने में होना था।
AI और डेटा सेंटरों की बढ़ेगी ऊर्जा खपत
भविष्य की जरूरत है परमाणु ऊर्जा
संयुक्त राष्ट्र में राफेल ग्रॉसी का यह संबोधन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पर्यावरण संकट और तकनीकी क्रांति के इस दौर में परमाणु ऊर्जा अब कोई 'विकल्प' नहीं, बल्कि 'जरूरत' बन चुकी है। हालांकि, जहां एक तरफ AI और टेक जगत की मदद के लिए न्यूक्लियर पावर को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ परमाणु हथियारों का बढ़ता प्रसार और युद्ध क्षेत्रों में बने रिएक्टर दुनिया की शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
