Two Shiv Senas Dussehra Rallies 2026: विजयादशमी (दशहरा) का अवसर महाराष्ट्र और विशेषकर मुंबई की राजनीति में हमेशा से शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा दिन रहा है। वर्ष 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन के बाद से यह परंपरा दो हिस्सों में बंट चुकी है। इस बार भी मुंबई शहर दो अलग-अलग स्थानों पर दो शिवसेनाओं की भव्य रैलियों और राजनीतिक हुंकार का गवाह बन रहा है:
दो शिवसेना, दो दशहरा कार्यक्रम: उद्धव और शिंदे के लिए दांव पर क्या लगा है?
उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena UBT): दादर स्थित ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क (जिसे शिवसैनिक 'शिवतीर्थ' कहते हैं) से अपनी राजनीतिक विरासत और वफादारी का संदेश दे रहे हैं।
एकनाथ शिंदे गुट (Shiv Sena): महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गुट उत्तरी मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को (NESCO) सेंटर और बॉम्बे एग्जीबिशन सेंटर में अपना विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन व शक्ति प्रदर्शन आयोजित कर रहा है।
शिवाजी पार्क (शिवतीर्थ) का ऐतिहासिक महत्व और उद्धव गुट का दांव
शिवजी पार्क केवल एक मैदान नहीं, बल्कि शिवसेना की पहचान का भावनात्मक केंद्र रहा है:
ऐतिहासिक शुरुआत: 30 अक्टूबर 1966 को शिवसेना की स्थापना के चार महीने बाद पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने अपनी पहली सार्वजनिक रैली इसी मैदान से की थी।
सालाना परंपरा: 2012 में अपने निधन तक बालासाहेब लगभग हर साल इसी मैदान से शिवसैनिकों को संबोधित करते थे। 2013 से इस परंपरा को उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने संभाला।
विरासत पर कब्जा: 2022 में पार्टी टूटने के बाद दोनों गुटों में इस मैदान को लेकर कानूनी लड़ाई हुई थी, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव गुट को अनुमति दी थी। इसके बाद से शिंदे गुट ने यहां के लिए आवेदन करना बंद कर दिया और इस साल बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने उद्धव गुट को एकमात्र आवेदक होने पर मैदान की मंजूरी दी।
उद्धव ठाकरे का एजेंडा: संस्थागत झटकों के बावजूद उद्धव ठाकरे इस मैदान के जरिए पार्टी की भावनात्मक निरंतरता और 'असली शिवसेना' होने का दावा पेश कर रहे हैं। उनका फोकस संविधान की रक्षा, NEET परीक्षा में अनियमितताओं और सरकार बदलने के राजनीतिक आह्वान पर है।
दोनों सेनाएं अपनी मजबूती बनाए रखने के लिए करेंगी शक्ति प्रदर्शन
एकनाथ शिंदे गुट की विधायी ताकत और ग्रामीण संकट पर फोकस
कानूनी और राजनीतिक आंकड़ों के लिहाज से एकनाथ शिंदे का पलड़ा बेहद भारी नजर आता है:
संख्या बल और आधिकारिक मान्यता: 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिंदे गुट ने 288 में से 57 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उद्धव ठाकरे की 'शिवसेना (UBT)' को केवल 20 सीटें मिलीं। चुनाव आयोग और अदालतों ने एकनाथ शिंदे के गुट को ही आधिकारिक 'शिवसेना' की मान्यता और चुनाव चिह्न सौंपा है।
स्थान बदलने की रणनीति: विश्लेषकों के अनुसार, शिंदे ने शिवाजी पार्क की जिद्द छोड़ गोरेगांव का नेस्को सेंटर इसलिए चुना क्योंकि वे संस्थागत लड़ाई पहले ही जीत चुके हैं। शुरुआत में उन्हें पहचान की जरूरत थी, जो अब स्थापित हो चुकी है।
किसानों और राहत कार्यों पर जोर: शिंदे गुट ने अपनी इस दशहरा रैली को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को समर्पित किया है। रैली के मंच से चक्रवात व सूखे से प्रभावित लोगों के लिए साइकिल, सिलाई मशीनें और राशन किट बांटने जैसी जमीनी राहत योजनाओं का एलान किया जा रहा है।
दोनों रैलियों की मुख्य बातें
स्थल चयन: उद्धव ठाकरे का पारंपरिक केंद्र 'दादर (शिवाजी पार्क)' बनाम एकनाथ शिंदे का उपनगरीय केंद्र 'गोरेगांव (नेस्को)'।
विचारधारा व मुद्दे:
उद्धव गुट: संविधान सुरक्षा, विपक्ष का एकजुट मंच, चुनावी प्रक्रिया और NEET जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन।
शिंदे गुट: ग्रामीण संकट, सूखाग्रस्त किसानों की मदद, कल्याणकारी योजनाएं और अपनी सरकारी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड।
भीड़ और जनाधार का परीक्षण: जहां शिवाजी पार्क में जुटने वाली भीड़ से यह तय होगा कि उद्धव ठाकरे अपने पारंपरिक और कैडर वोटों को कितना संभाल पा रहे हैं, वहीं नेस्को सेंटर की रैली शिंदे गुट की राज्यव्यापी पकड़ और संगठनात्मक ताकत का प्रमाण बनेगी।
