महान फिल्मकार सत्यजीत रे के पुश्तैनी घर की क्या है असलियत? इमारत गिराने से क्यों पीछे हटी बांग्लादेश सरकार

सत्यजीत रे की गिनती भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकारों में होती है। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। रे एक सफल निर्देशक, पटकथा लेखक, संगीतकार थे। इन्होंने कई चर्चित पुस्तकें लिखीं। चित्रकारी और ग्राफिक डिजाइनिंग में भी रे का नाम है । रे के दादा उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी और पिता सुकुमार रे दोनों ही प्रसिद्ध लेखक और प्रकाशक थे। रे ने अपना फिल्मी करियर 1955 में 'पाथेर पंचाली' से शुरू किया

Satyajit Ray ancestral home : मशहूर फिल्मकार सत्यजीत रे के बांग्लादेश में पुश्तैनी मकान को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के दावे किए गए हैं। दावा किया गया कि यह मैमनसिंह रोड पर स्थित ढहाया जा रहा मकान सत्यजीत रे के पूर्वजों का है, इन दावों पर भारत सरकार भी सक्रिय हुई और उसने बांग्लादेश सरकार से इस मकान को न तोड़ने का अनुरोध किया। साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस आवास के पुनर्निमाण एवं पुनरुद्धार में मदद करने के लिए वह तैयार है। अब बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि मैमनसिंह रोड पर स्थित जिस जीर्ण इमारत को सत्यजीत रे का पुश्तैनी मकान बताया जा रहा है, दरअसल यह उनके पूर्वजों का नहीं है। तो यह जानना जरूरी है कि जिस घर को सत्यजीत रे का पुश्तैनी आवास कहा जा रहा है, आखिर वह किसका है और उसका मालिकाना हक किसके पास है।

Satyajit Ray

बांग्लादेश में है सत्यजीत रे का पुश्तैनी घर! तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल

कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह घर प्रसिद्ध बंगाली लेखक और सत्यजीत रे के दादा उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी का था और इसे अब गिराए जाने पर लोग निराश और चिंतित हैं। यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब बांग्लादेश में सरकार परिवर्तन के बाद भारत और ढाका के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में शरण ली है और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार उनके प्रत्यर्पण को लेकर भारत सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।

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