आज भी हजारों लोगों का कुछ अता-पता नहीं, आवाज उठाने वाले बलोचों को 'गायब' करती आई है पाकिस्तानी सेना

Jaffar Train Attack : बलूचिस्तान की अगर बात करें तो यह प्रांत पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यहां बलूच लोगों की आबादी करीब डेढ़ करोड़ है। पाकिस्तान का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान का ही है। यह प्रांत प्राकृतिक संसाधनों से भरा पड़ा है। दुर्लभ खनिज तत्व और गैस होने के बावजूद बलूचिस्तान के लोग गरीबी और पिछड़ेपन में जी रहे हैं। इनके यहां न अच्छी सड़कें हैं, न स्कूल हैं, न अस्पताल।

Jaffar Train Attack : बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस के हाईजैक होने के बाद पाकिस्तान सेना में हड़कंप मचा हुआ है। अभी तक की जो रिपोर्टें हैं उसके मुताबिक बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने अपनी मांग पूरी करने के लिए समय सीमा घटाकर 24 घंटे कर दी है। बीएलए का कहना है कि पाकिस्तानी सेना के रुख को देखते हुए उसे ऐसा लगता है कि वह बंधकों को नहीं छुड़ाना चाहती। समय सीमा बीत जाने पर वह अपनी अदालत में इन्हें सजा सुनाएगा और हर घंटे पांच सैन्यकर्मियों को मार देगा। मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मर्जा ने कहा है कि क्वेटा रेलवे स्टेशन पर 200 से ज्यादा ताबूत लाए गए हैं। यह बताता है कि पाकिस्तानी सेना बंधकों को छुड़ाने के लिए बातचीत नहीं करना चाहती। उधर, पाकिस्तानी सेना का कहना है कि हाईजैक हुई जाफर एक्सप्रेस को अपने कब्जे में ले लिया गया है और वहां मौजूद 33 आतंकवादियों को उसने मार गिराया है।

pak army

बलोच लोगों के लिए आवाज उठाती हैं महरंग।

पाकिस्तानी सेना की कैद से रिहाई की मांग

जाहिर है कि बीएलए के कब्जे में जो करीब 200 बंधक सैन्यकर्मी हैं, उनका भविष्य कैसा होगा यह बहुत कुछ पाकिस्तानी सेना के रुख पर निर्भर करता है। पाकिस्तान की सेना और हुकूमत अगर उनकी बात मान लेती है तो संभव है कि इन सैन्यकर्मियों की जिंदगी बच जाए। दरअसल, बलोच की नई मांग नहीं कर रहे हैं, वे वर्षों से अपने लापता और जेलों में कथित रूप से बंद लोगों को रिहा करने की मांग करते आए हैं लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मांग मनवाने के लिए सैन्यकर्मियों को ले जा रही ट्रेन को अगवा कर लिया। दरअसल, 1948 में बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा होने के बाद से ही बलोच लोगों पर जुर्म और अत्याचार हो रहे हैं। पाकिस्तानी सेना तरह-तरह से इन्हें प्रताड़ित और इन पर अत्याचार करती आई है।

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