तमिल थाई वाझ्थु पहले, वंदे मातरम् बाद में… तमिलनाडु में क्यों बदलेगा गीतों का क्रम? CM विजय के प्रस्ताव से गरमाई सियासत

तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ और ‘वंदे मातरम्’ के क्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में प्रस्ताव रखकर मांग की है कि राज्य के कार्यक्रमों की शुरुआत पहले ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से हो, उसके बाद ‘वंदे मातरम्’ और फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाए। आइए समझते हैं कि आखिर विवाद क्या है।

तमिलनाडु में इन दिनों एक दिलचस्प राजनीतिक बहस चल रही है। मुद्दा है सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ और ‘वंदे मातरम्’ (Vande Mataram) के बीच क्रम का। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय चाहते हैं कि राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत पहले ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से हो। इसके बाद ‘वंदे मातरम्’ और फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया जाए। गौरतलब है कि विजय सरकार ने इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव भी रखा है। इसके साथ ही राज्य में एक बार फिर भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

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आइए जानते हैं कि क्यों चाहते हैं विजय कि सबसे पहले गाया जाए ‘तमिल थाई वाझ्थु’। AI IMAGE

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

इस पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह से हुई। समारोह में पहले ‘वंदे मातरम्’, फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और उसके बाद ‘तमिल थाई वाझ्थु’ (Tamil Thaai Vazhthu) प्रस्तुत किया गया। यहीं से सवाल उठने लगे। वजह यह थी कि तमिलनाडु में लंबे समय से सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ से करने की परंपरा रही है। ऐसे में राज्य गीत को सबसे आखिर में रखने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

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