आजादी की अनसुनी कहानी: वो क्रांतिकारी जिसने 21 साल बाद लिया था जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला

Azadi Ka Itihas: भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजादी दिलाने में लाखों क्रांतिकारियों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। ऐसे न जाने कितने गुमनाम हीरो हैं, जो देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ते रहे और अपनी जिंदगी तक कुर्बान कर दी। ऐसी ही एक कहानी से आपको रूबरू इस लेख में करवाते हैं।

Azadi Ke Kisse: जब भारत पर अंग्रेजों की हुकूमत थी, उस वक्त हमारे देश के कैसे हालात रहे होंगे इसकी कल्पना कर पाना भी किसी डरावने सपने से कम नहीं होगा। 190 साल तक गोरों ने हिंदुस्तान पर अपनी तानाशाही चलाई, क्रूरते की सारी हदें तोड़ दीं। मगर उस वीर सपूतों के बलिदान को याद कर हर भारतीय का सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है। उन क्रातिंकारियों ने देश को आजाद कराने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान करने से पहले एक पल भी नहीं सोचा। गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी, एक पल के लिए भी हार नहीं मानी। कई गुमनाम हीरो की कहानियां किताबों में बंद हैं, इन्हीं में से एक ऐसा क्रांतिकारी था, जिसने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए 21 साल तक इंतजार किया।

Sardar Udham Singh Story

जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने वाले क्रांतिकारी की कहानी।

वो क्रांतिकारी जिसने अंग्रेजों से 21 साल बाद लिया था बदला

वैसे तो कई कहानियां और किस्से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं, लेकिन इस लेख में आपको उस क्रांतिकारी के बारे में बताते हैं, जिसने अंग्रेजों की धरती लंदन जाकर जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार का बदला लिया, वो भी एक या दो साल नहीं, बल्कि 21 साल बाद। उसने उस अंग्रेज अफसर को गोली मारी और मौत के घाट उतारा दी थी, जिसके कार्यकाल के दौरान, 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। उस अंग्रेज अफसर का नाम सर माइकल फ्रांसिस ओ'डायर था, जो 1913 और 1919 के बीच ब्रिटिश भारत के पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। ओ'डायर को मारकर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने वाले क्रांतिकारी का नाम सरदार उधम सिंह है।

End of Feed