Asim Munir’s Meetings With Sharif And Zardari: पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की अटकलें अभी थमी नहीं हैं, और इस बीच सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात ने नए कयास पैदा कर दिए। शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ उनके आवास पर बैठक की थी, जिसके कुछ ही देर बाद आसिम और शहबाज की मुलाकात हुई। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों ताबड़तोड़ इस तरह की बैठकें हो रही हैं। पहले से ही खबरें आ रही हैं कि आसिम मुनीर देश के शासन की बागडोर अपने हाथ में लेकर पाकिस्तान का सर्वेसर्वा बनना चाहते हैं। ऐसे में बैठकों के नए दौर ने आशंका पैदा कर दी है कि कहीं शासन पूरी तरह सेना के हाथों में न चला जाए।
पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर चल रहे नई चाल (AP)
आसिम मुनीर को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा गर्म
लगातार हुई इन मुलाकातों ने एक बार फिर पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में इन अफवाहों को हवा दे दी कि आसिम मुनीर कोई बड़ा गेम खेल रहे हैं। कयास लग रहे हैं कि मुनीर राष्ट्रपति को बदलने के लिए शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा है कि इस्लामाबाद 27वें संशोधन को लागू कर सकता है, जिसके बाद राष्ट्रपति जरदारी इस्तीफा दे सकते हैं। उनकी जगह आसिम मुनीर आ सकते हैं और देश की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले सकते हैं।
'सेना की राजनीति में कोई रुचि नहीं'
हालांकि, हमेशा की तरह पाकिस्तान की कमजोर सरकार ने ऐसी किसी बात को खारिज किया है कि सेना पाकिस्तानी सरकार की बागडोर संभाल सकती है। ऐसी खबरों को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खारिज कर दिया। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स को विश्वसनीयता की कमी बताते हुए खारिज कर दिया है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए आसिफ ने पुष्टि की कि मुनीर और शरीफ के बीच बातचीत के दौरान राष्ट्रपति जरदारी के इस्तीफे और उसके बाद सेना द्वारा कमान संभालने की खबरों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया और पाकिस्तानी मीडिया के दावों को निराधार बताया।
उन्होंने कहा कि जरदारी शरीफ और मुनीर के बीच हुई मुलाकात से अच्छी तरह वाकिफ थे। आसिफ ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति इस मुद्दे से पूरी तरह वाकिफ थे और उन्होंने सरकार पर पूरा भरोसा जताया था। यह सब हवा-हवाई है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख की राजनीति में कोई रुचि नहीं है। उन्हें [मुनीर] किसी चीज की जरूरत नहीं है।
शरीफ ने भी दावों का खंडन किया
पिछले हफ़्ते, प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा था कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कभी राष्ट्रपति बनने की इच्छा नहीं जताई है, न ही ऐसी कोई योजना है। गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने भी पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाकर चलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण अभियान की आलोचना की। एक्स पर एक पोस्ट में नकवी ने सुझाव दिया कि इन अफवाहों को फैलाने के पीछे विदेशी समूह हैं और कहा कि सरकार जानती है कि इस कहानी को आगे बढ़ाने के लिए कौन जिम्मेदार है।
कमजोर शहबाज पर हावी आसिम मुनीर
लेकिन कमजोर शहबाज शरीफ सरकार के दावों पर यकीन करना मुश्किल है। कमजोर साबित हो चुके शरीफ पहले ही बैकफुट पर हैं। इमरान खान को जेल में डालने के बाद आसिम मुनीर बेलगाम हो चुके हैं और सरकार पर पूरा दबाव बनाकर रखा है। बिना सेना की मर्जी के शरीफ सरकार कोई बड़ा फैसला नहीं कर सकती है। आसिम का शरीफ सरकार पर कितना बड़ा असर है इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह पिटने के बाद मुनीर ने पीएम शहबाज शरीफ से फील्ड मार्शल का तमगा हासिल कर लिया।
अयूब खान के रास्ते पर आसिम मुनीर
पाकिस्तान के लिए ये नई बात नहीं है कि जब बिना युद्ध लड़े ही किसी सेना प्रमुख ने फील्ड मार्शल की पदवी ले ली हो। पाकिस्तान में पहले भी ऐसा हो चुका है जब जनरल अयूब खान ने फील्ड मार्शल का तमगा लिया था। अयूब खान ने 1959 में जबरन फील्ड मार्शल का तमगा लिया था। तख्तापलट के बाद पाकिस्तान का राष्ट्रपति रहने के दौरान अयूब ने यह पद खुद को दिया था और सेना और सरकार दोनों पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया था। फेल्ड मार्शल मुल्ला आसिम मुनीर ने भी इसी तर्ज पर भारत के साथ संघर्ष में मुंह की खाने के बाद फील्ड मार्शल का तमगा ले लिया और सेना-सरकार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब चर्चा है कि जरदारी से इस्तीफा दिलवाकर आसिम मुनीर खुद उस पद पर बैठकर पाकिस्तान पर लंबे समय तक राज करना चाहते हैं। पाकिस्तान की कमजोर सरकार, लगातार मजबूत होता भारत और मौजूदा वैश्विक जियोपॉलिटिक्स, इन्हें देखते हुए मुनीर का विरोध करने की ताकत पाकिस्तान में किसी में नहीं है और इसी वजह से उनका रास्ता साफ नजर आ रहा है।
