Internal War In INDI Alliance: 'अधीर रंजन चौधरी बीजेपी के एजेंट हैं।', ऐसा दावा तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने किया है। दरअसल, ये अधीर रंजन की उस बयान पर पलटवार था, जिसमें उन्होंने ईडी के अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर ममता सरकार को भला-बुरा कह दिया था। गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस और टीएमसी दोनों ही विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) में सहयोगी हैं।
चुनाव से पहले बढ़ेगी ममता और कांग्रेस की दुश्मनी?
क्या है ये नया विवाद?
पश्चिम बंगाल में छापेमारी करने पहुंची प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पर हमला हुआ तो अपने सहयोगी दल टीएमसी की आलोचना करते हुए अधीर रंजन ने ममता बनर्जी और उनकी सरकार को जमकर भला-बुरा कह दिया। उन्होंने निशाना साधते हुए दावा किया कि 'राज्य में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। ईडी अधिकारियों पर सत्तारूढ़ सरकार के गुंडों के हमले के बाद यह स्पष्ट है कि राज्य में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। आज वे घायल हुए हैं, कल उनकी हत्या हो सकती है। ऐसी बात कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।'
अधीर के बयान का साइडइफेक्ट
बात यहीं खत्म नहीं हुई। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता कह जाने वाले गिरिराज सिंह ने भी अधीर रंजन के बयान को कोट कर दिया। ऐसे में टीएमसी को मिर्ची लगनी लाजमी है। गिरिराज सिंह ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र जैसा कुछ नहीं है। ऐसा लगता है कि वहां किम जोंग-उन की सरकार है। अधीर रंजन ने कहा है कि अगर हत्या भी हो जाए तो कोई नई बात नहीं होगी। यह ममता बनर्जी का लोकतंत्र है।' जल्द ही लोकसभा चुनाव की तारीखें आ जाएंगी, ऐसे में सवाल यही है कि आखिर बंगाल में कांग्रेस किस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। क्या ये संयोग है कि बार-बार अधीर रंजन टीएमसी और ममता बनर्जी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं या फिर कांग्रेस सोच-समझकर पश्चिम बंगाल में प्रयोग कर रही है।
लालू यादव भी उठा चुके हैं ये मुद्दा
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के अधीर रंजन की बयानबाजी से ममता बनर्जी की टीएमसी बार-बार नाराज हो ही जाती है। नाराजगी भी लाजमी है, जब दोनों पार्टियां एक दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी हैं। खुद ममता बनर्जी INDIA की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे कर चुकी हैं, ऐसे में अधीर के बयानों के चलते क्या कांग्रेस और टीएमसी के बीच दुश्मनी गहरा जाएगी। क्योंकि लालू यादव ये मुद्दा उठा चुके हैं कि जब केंद्र में टीएमसी और कांग्रेस साथ हैं तो पश्चिम बंगाल में अधीर रंजन टीएमसी के खिलाफ बयानबाजी क्यों करते हैं?
अधीर रंजन के चलते बढ़ेगा मनमुटाव?
बीते लंबे समय से कांग्रेस और टीएमसी के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पश्चिम बंगाल दोनों के बीच सियासी और जुबानी जंग का सिलसिला बदस्तूर जारी है। दोनों न सिर्फ एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, बल्कि एक-दूसरे को कमजोर करने में भी जुटे हैं। कुछ दिनों पहले ही ममता बनर्जी के करीबी कहे जाने वाले यासिर हैदर ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। यासिर ने पिछले साल ही टीएमसी से दूरी बना ली थी, वो ममता सरकार में मंत्री फिरहाद हकीम के दामाद हैं और खास बात तो ये है कि यासिर हैदर को अधीर रंजन ने ही कांग्रेस की सदस्यता दिलाई थी।
आपसी लड़ाई बढ़ा रही गठबंधन की चिंता
आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही अब तक विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बात नहीं बन सकी है। 'NDA' vs 'INDIA' के बीच होने वाली चुनावी लड़ाई से पहले ही 'इंडिया' की आपसी लड़ाई चिंता बढ़ा रही है। हाल ही में गठबंधन के चार बड़े दलों के एक-दूसरे के प्रति मनमुटाव देखने को मिली। इनमें कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी और आम आदमी पार्टी शामिल हैं। इस रंजिश का आगामी चुनावों में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
किन-किन राज्यों में खतरे में अस्तित्व?
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ये मुख्य 9 राज्य हैं, जहां विपक्षी गठबंधन की एकता में दरार देखी जा सकती है। इनमें सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई हैं, क्योंकि अकेले यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं और बंगाल में 42 सीटें हैं। इन दोनों राज्यों की मुख्य क्षेत्रीय पार्टियां समाजवादी पार्टी और टीएमसी दोनों ही कांग्रेस से उखड़े-उखड़े हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले कहीं कांग्रेस अलग-थलग ना पड़ जाए। सवाल वही है कि ये संयोग है या फिर कांग्रेस का प्रयोग है।
