कर्नाटक में CM उम्मीदवार की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे BJP-कांग्रेस? 5 प्वाइंट्स में समझें

  • Authored by: आलोक कुमार राव
  • Updated Apr 4, 2023, 02:20 PM IST

Karnataka Assembly elections 2023 : राज्य में जब 2018 के विधानसभा चुनाव होने वाले थे, उससे करीब एक साल पहले तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने येदियुरप्पा को सीएम उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन इस बार सत्ता में रहते हुए भी भाजपा अपना सीएम उम्मीदवार घोषित करने से बच रही है। इस बार भगवा पार्टी फू्ंक-फूंक कर कदम आगे रख रही है।

Karnataka Assembly elections 2023 : कर्नाटक विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद से राज्य में सियासी पारा गर्म हो गया है। चुनाव होने में अब एक महीने से भी कम सयम बचा है लेकिन राज्य की दोनों बड़ी पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। दोनों पार्टियों ने सीएम उम्मीदवार पर सस्पेंस बनाकर रखा है। सीएम उम्मीदवार की घोषणा करने में (JD-S) आगे है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसकी तरफ से सीएम उम्मीदवार एचडी कुमारस्वामी (HD Kumaraswamy) होंगे। सवाल है कि आखिरकार राज्य में कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी वाली दोनों पार्टियां भाजपा (BJP)और कांग्रेस (Congress)सीएम उम्मीदवार की घोषणा करने से बच क्यों रही हैं, यहां हम पांच प्वाइंट में उनकी रणनीति को समझने की कोशिश करेंगे-

Karnataka Chunav 2023

कर्नाटक में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है।

  1. चुनाव की घोषणा होने से पहले भाजपा ने साफ कर दिया था कि वह सीएम बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। साथ ही उसने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम की घोषणा होने के बाद ही पार्टी मुख्यमंत्री पद के चेहरे का चुनाव करेगी। भाजपा की तरह कांग्रेस भी सीएम चेहरे को लेकर उधेड़बुन में है। विपक्ष के नेता सिद्दारमैया (Siddaramaiah) और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar)ने खुले तौर पर बोल चुके हैं कि वे सीएम पद की रेस में हैं। उनके इस दावे के बाजवूद कांग्रेस आलाकमान की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
  2. राज्य में जब 2018 के विधानसभा चुनाव होने वाले थे, उससे करीब एक साल पहले तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने येदियुरप्पा (Yediyurappa) को सीएम उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन इस बार सत्ता में रहते हुए भी भाजपा अपना सीएम उम्मीदवार घोषित करने से बच रही है। इस बार भगवा पार्टी फू्ंक-फूंक कर कदम आगे रख रही है। सूत्रों का कहना है कि सीएम उम्मीदवार घोषित न करने की भाजपा की सबसे बड़ी वजह खुद येदियुरप्पा हैं। भाजपा के पास येदियुरप्पा (Yediyurappa)के कद एवं प्रभाव के बराबर कोई नेता नहीं है। बोम्मई साल 2021 में सीएम तो बने लेकिन राज्य में येदियुरप्पा की तरह उनका प्रभाव नहीं है।
  3. कर्नाटक के चुनाव में जाति हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। जाति को दरकिनार कर कोई भी पार्टी यहां सत्ता में नहीं आ सकती। यह बात दोनों ही पार्टियां भाजपा और कांग्रेस अच्छी तरह समझती हैं। कर्नाटक की सत्ता में आने के लिए किसी भी दल को यहां के दो बड़े समुदायों लिंगायत (Lingayats) एवं वोक्कालिगा ( Vokkaligas) दोनों का समर्थन हासिल करना जरूरी होता है। लिंगायत समुदाय को भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता है जबकि वोक्कालिंगा जेडी-एस के कोर वोट बैंक हैं। येदियुरप्पा ने इस बार चुनावी राजनीति से दूरी बना ली है। वह न तो चुनाव लड़ रहे हैं और न ही सीएम पद के उम्मीदवार हैं। ऐसी सियासी परिस्थिति में भाजपा लिंगायत एवं वोक्कालिगा समुदायों के समर्थन से एक नया सोशल इंजीनियरिंग खड़ा करने की कोशिश में है।
  4. इस जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने राज्य में चुनाव प्रचार अभियान की कमान लिंगायत समुदाय से आने वाले बीएम बोम्मई को दी है। जबकि चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी वोक्कालिगा समुदाय से आने वाली केंद्रीय मंत्री शोभा कारनदलाजे को दी गई है। यही नहीं, इन दोनों समुदायों को रिझाने के लिए भाजपा सरकार ने दो-दो प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने को मंजूरी दी है। कर्नाटक भाजपा में आपसी खींचतान भी है। यहां भाजपा के कई गुट काम करते हैं। बोम्मई, येदियुरप्पा, बीएल संतोष सहित केंद्रीय मंत्रयों के अपने-अपने धड़े हैं। ये सभी नेता खुद को सीएम पद की रेस में देखते हैं।
  5. भाजपा की तरह कर्नाटक कांग्रेस में भी कुई गुट हैं। एक धड़ा डीके शिवकुमार का है तो दूसरा पूर्व सीएम सिद्दारमैया का है। दोनों नेता सत्ता में कांग्रेस की वापसी होने पर सीएम बनने का दावा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि इस बारे में वह पार्टी आलाकमान के निर्देशों का पालन करेंगे। अपने इन दोनों बड़े नेताओं की महात्वाकांक्षाओं को देखते हुए कांग्रेस सीएम उम्मीदवार को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही है। कांग्रेस चुनाव नतीजों का इंतेजार करेगी। कांग्रेस इस चुनाव में डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया दोनों के राजनीतिक आधार का फायदा उठाना चाहती है। शिवकुमार वोक्कालिंगा समुदाय से आते हैं जबकि सिद्दारमैय कोरबा समुदाय से हैं। कोरबा समुदाय ओबीसी के अंतर्गत आता है और इस समुदाय में सिद्दारमैया की अच्छी पकड़ है। यह बात भी कांग्रेस की नजर में है।

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