खामेनेई की तस्वीर से सिगरेट जला रहीं युवतियां, 217 मौतों का दावा; महंगाई से आजादी की मांग तक कैसे पहुंचा आंदोलन?

तेहरान के हालात बेहद नाजुक हैं। लोग सड़क पर हैं, हिंसा में कइयों की जान जा चुकी है, इंटरनेट सेवाएं लगभग 36 घंटे से ठप हैं। लोगों का गुस्सा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शासन व्यवस्था के खिलाफ उग्र रूप ले चुका है। वहीं, ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि यह विरोध कब और कैसे शुरू हुआ, अभी इसका प्रसार कहां तक है और यह पहले के आंदोलनों से क्यों अलग है? साथ ही इसके पीछे ‘मोरल पुलिसिंग’, आर्थिक दबाव और अमेरिका के साथ टकराव जैसी परतें कैसे जुड़ी हैं?

ईरान की सड़कों पर जो कुछ इन दिनों दिख रहा है, वह किसी हालिया फैसले या किसी एक घटना का परिणाम नहीं है। यह सालों की उस बेचैनी की तस्वीर है, जो दशकों से आम लोगों के भीतर जमा होती रही और अब अचानक बाहर आ गई है। इस आंदोलन की शुरुआत भले ही महंगाई से हुई हो, लेकिन बात अब सिर्फ वस्तुओं की कीमत और रियाल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने तक सीमित नहीं रह गई है। यह आंदोलन आज जीवन की आजादी, महिलाओं की भूमिका, राज्य की निगरानी और सत्ता की जवाबदेही जैसे बुनियादी सवालों तक पहुंच चुका है। लोगों का गुस्सा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शासन व्यवस्था के खिलाफ उग्र रूप ले चुका है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि यह विरोध कब और कैसे शुरू हुआ, अभी इसका प्रसार कहां तक है और यह पहले के आंदोलनों से क्यों अलग है? साथ ही इसके पीछे ‘मोरल पुलिसिंग’, आर्थिक दबाव और अमेरिका के साथ टकराव जैसी परतें कैसे जुड़ी हैं?

ईरान में क्यों भड़का विद्रोह?

ईरान में क्यों भड़का विद्रोह?

ईरान की सत्ता के केंद्र में कौन?

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था की जड़ें 1979 की इस्लामिक क्रांति में हैं, जब मौलवियों ने पश्चिम समर्थित शाह की सत्ता को हटाकर इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की थी। तब से देश की सर्वोच्च शक्ति निर्वाचित सरकार के बजाय धार्मिक नेतृत्व के पास केंद्रित रही है। भले ही 2024 में मसूद पेजेशकियान राष्ट्रपति चुने गए हों, लेकिन आज भी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ही हैं।

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