BRICS Summit 2025: आतंकवाद की समस्या से कहीं ना कहीं दुनिया के तमाम देश दो-चार हो रहे हैं, ये दीगर बात है कि कहीं ये समस्या ज्यादा बड़ी है तो कहीं इसका असर कम दिखता है, भारत की बात करें तो आतंकवाद यहां नासूर की तरह से पनप रहा है, इसे लेकर कई बार उठाई जाती रही है वहीं इस बार ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 'ब्रिक्स समिट 2025' (BRICS Summit 2025) में आंतकवाद के मुद्दे (Terrorism) पर भारत को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है बता दें कि सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए इस साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की, इसे आतंकवाद के खिलाफ बड़ी पहल माना जा रहा है...
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2025
ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं ने एक घोषणापत्र जारी करके सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। रियो घोषणापत्र के पैरा के मुताबिक, 'हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हम आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।'
SCO की बैठक में भी 'आतंकवाद' पर हुई थी बात पर...
गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के रक्षा मंत्री 'आतंकवाद' के उल्लेख पर आम सहमति के अभाव के कारण अपनी वार्ता के अंत में संयुक्त वक्तव्य पारित करने में असमर्थ रहे थे बता दें कि नई दिल्ली ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि इसमें पहलगाम हमले (Pahalgam Terror Attack) यानी 22 अप्रैल को कश्मीर में पर्यटकों पर हुए हमले का उल्लेख नहीं था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, लेकिन 'बलूचिस्तान' में आतंकवादी गतिविधियों को शामिल किया गया था। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया लेकिन इस्लामाबाद ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। पाकिस्तान ने इस बात से इनकार किया कि इन ठिकानों का 'आतंकवाद' से कोई संबंध है तथा ये नागरिक सुविधाएं हैं।
'आतंकवादी गतिविधियों और उनके समर्थन में शामिल लोगों की जवाबदेही हो तय'
ब्रिक्स नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा, 'हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और आतंकवादी गतिविधियों और उनके समर्थन में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और प्रासंगिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।'
'पहलगाम आतंकी हमला भारत की आत्मा, अस्मिता और गरिमा पर सीधा प्रहार'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद आज मानवता के लिए सबसे गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। हाल ही में भारत ने एक अमानवीय और कायरतापूर्ण आतंकी हमले का सामना किया। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भारत की आत्मा, अस्मिता और गरिमा पर सीधा प्रहार था। यह हमला सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी मानवता पर आघात था। इस दुख की घड़ी में जो मित्र देश हमारे साथ खड़े रहे, जिन्होंने समर्थन और संवेदना व्यक्त की, मैं उनका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।
आतंकवाद के पीड़ित और समर्थक को एक ही तराजू पर नहीं तौल सकते
पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद की निंदा हमारा 'सिद्धांत' होना चाहिए, सिर्फ 'सुविधा' नहीं। अगर पहले यह देखेंगे कि हमला किस देश में हुआ, किसके विरुद्ध हुआ तो यह मानवता के खिलाफ विश्वासघात होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर कोई संकोच नहीं होना चाहिए। आतंकवाद के पीड़ित और समर्थक को एक ही तराजू पर नहीं तौल सकते। निजी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए आतंकवाद को मूक सम्मति देना, आतंक या आतंकियों का साथ देना, किसी भी अवस्था में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। आतंकवाद को लेकर कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
आतंकवाद पर भारत का 'कड़ा स्टैंड' उसके दबदबे का सबूत
बता दें कि ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है इसमें दुनिया की ग्यारह प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं, इसमें चीन भी शामिल है और चीन और पाकिस्तान की दोस्ती जगजाहिर है पाक को चीन की बैकिंग के बावजूद भी 'पहलगाम आतंकी हमले' के साथ-साथ आतंकवाद पर इतना कड़ा स्टैंड भारत के दबदबे और उसके पहल की मिसाल है जिससे इस मुद्दे पर आगे और भी कड़े कदम उठाए जाने का रास्ता तो खुलता ही है...
