जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की लड़ाई को कैसे तेज करेगा NISAR? दुनिया को होंगे क्या-क्या फायदे?

निसार मिशन (NISAR) भारत और अमेरिका के बीच पहला संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह मिशन है, जो एक दशक की तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करता हुआ अपने मिशन पर आगे बढ़ रहा है।

How NISAR Will Work: अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की धमक लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दशक भर में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने जिस तरह की उपलब्धियां हासिल की हैं, उसकी दुनिया कायल हो गई है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिका का नेशनल एयरोनॉटिकल एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार हैं। यह प्रक्षेपण 30 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। भारत का भारी-भरकम यान भारतीय समयानुसार शाम 5:40 बजे लॉन्चपैड से टेक ऑफ होगा और भारत और अमेरिका के बीच सबसे महंगे संयुक्त मिशन के साथ उड़ान भरेगा। क्या होगी निसार की खासियतें और ये जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में योगदान देते हुए कैसे भारत और विश्व को फायदा पहुंचाएगा, आइए जानते हैं।

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भारत ही नहीं दुनिया को फायदा पहुंचाएगा NISAR (Credit: NASA/JPL-Caltech)

निसार में अत्याधुनिक रडार क्षमताएं

निसार मिशन (NISAR) भारत और अमेरिका के बीच पहला संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह मिशन है, जो एक दशक की तकनीकी साझेदारी को और मजबूत करता हुआ अपने मिशन पर आगे बढ़ रहा है। 1.5 अरब डॉलर की लागत से विकसित निसार में अत्याधुनिक रडार क्षमताएं हैं जो अभूतपूर्व सटीकता के साथ पृथ्वी की भूमि और बर्फ की सतहों का विस्तृत, 3 डी मैपिंग प्रदान करेंगी। उपग्रह का द्वि-आवृत्ति रडार, जो दुनिया का पहला कक्षा में स्थापित रडार है, नासा के एल-बैंड और इसरो के एस-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीकों का संयोजन करता है। निसार हर 12 दिनों में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और कई महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करेगा। ये अहम डाटा एकत्र करते हुए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाएगा। इससे मिले डेटा का इस्तेमाल धरती पर हो रहे जलवायु परिवर्तन के संबंध में अहम जानकारियां निकालने में होगा।

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