थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जंग जैसे हालात दिख रहे हैं, कभी भी दोनों देश के बीच स्थिति बहुत ही खराब हो सकती है। दोनों ओर से तोपें, रॉकेट्स और यहां तक कि हवाई हमले भी शुरू हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच जैसे हालात थे, उससे जंग के आसार की आशंका जताई जा रही थी। ये लड़ाई को 2-4 दिन पहले से शुरू नहीं हुई है, अचानक से नहीं हुई है, बल्कि यह सालों पुरानी लड़ाई है, जिसमें हर पैंतरे अपनाए जा चुके हैं। कानूनी जंग से शुरू हुई यह लड़ाई अब हथियारों तक पहुंच गई है, इस जंग को रोकने के चक्कर में थाईलैंड की पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा अपनी कुर्सी गंवा चुकी हैं। थाईलैंड-कंबोडिया के बीच इस जंग की नींव 1907 में ही पड़ गई थी और इसके केंद्र में एक फ्रांसिसी संधि है, जिसे फ्रेंको‑सियामी समझौता या फ्रेंको-सियासी संधि के नाम से जाना जाता है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जंग क्यों (फोटो- AP/Canva)
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क्या है फ्रेंको‑सियामी संधि
फ्रेंको‑सियामी समझौता एक ऐतिहासिक संधि है, जिसे 23 मार्च 1907 को फ्रांसीसी तीसरी गणराज्य और सियाम (वर्तमान थाईलैंड) के बीच किया गया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवादों का समाधान करना और फ्रांसीसी इंडोचाइना और सियाम के बीच स्पष्ट सीमाएं निर्धारित करना था। यह संधि 1893 के फ्रेंको‑सियामी संकट के बाद हुई। 1893 का फ्रेंको-सियामी संकट, जिसे थाईलैंड में रतनकोसिन युग 112 की घटना के रूप में भी जाना जाता है, फ्रांसीसी तृतीय गणराज्य और सियाम साम्राज्य के बीच एक संघर्ष था। यह संकट मुख्य रूप से लाओस के फ्रांसीसी नियंत्रण और सियामी क्षेत्र के विस्तार के प्रयासों के कारण हुआ था। जिसके बाद 1907 में हुए फ्रेंको‑सियामी संधि ने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित की। तब कहा गया कि फ्रैंको-सियासी समझौता न केवल दोनों देशों के बीच सीमा विवादों का समाधान किया, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीतिक समझौतों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संधि के मुख्य प्रावधान
सियाम द्वारा कंबोडिया को सौंपे गए क्षेत्र: सियाम ने फ्रांस को बैटम्बांग, सिएम रीप और सिसोफॉन क्षेत्र सौंपे, जो कंबोडिया का हिस्सा थे।
फ्रांस द्वारा सियाम को सौंपे गए क्षेत्र: फ्रांस ने सियाम को दन साई और त्राट क्षेत्रों के साथ-साथ कोह कूड द्वीप भी सौंपे।
सीमा निर्धारण: संधि के तहत, दोनों देशों के बीच सीमा रेखा को स्पष्ट किया गया और Dangrek मानचित्र के माध्यम से सीमाओं का निर्धारण किया गया।
फ्रेंको‑सियामी संधि (फोटो- Wikimedia Commons)
फ्रेंको‑सियामी संधि की खामियां
फ्रेंको‑सियामी समझौते तब सियाम (वर्तमान थाईलैंड) और फ्रांसीसी इंडोचाइना के बीच सीमा विवादों का समाधान किया, लेकिन इसके कुछ पहलुओं ने भविष्य में विवादों को जन्म दिया, विशेषकर प्रेह विहियर मंदिर क्षेत्र को लेकर। सीमा निर्धारण में कुछ क्षेत्रों, जैसे प्रेह विहियर मंदिर, स्पष्ट नहीं थे। Dangrek मानचित्र में इस मंदिर को कंबोडिया के क्षेत्र में दिखाया गया, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह सियाम के क्षेत्र में था। संधि के बाद तैयार किए गए मानचित्रों को लेकर विवाद उठे। कुछ मानचित्रों में सियाम के कुछ क्षेत्रों को फ्रांस के नियंत्रण में दिखाया गया, जबकि कुछ में उल्टा। इससे सीमा निर्धारण में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, जो बाद में विवादों का कारण बनी। संधि में सियाम को कुछ क्षेत्रों को सौंपने का दबाव था, जबकि फ्रांस ने अपने कुछ क्षेत्रों को सियाम को सौंपा। यह एकतरफा समझौता सियाम के लिए असहज था और इसे एक असमान संधि के रूप में देखा गया।
प्रेह विहियर मंदिर का इतिहास और विवाद
प्रेह विहियर मंदिर, जो 11वीं-12वीं सदी में खमेर साम्राज्य के दौरान निर्मित हुआ था, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक महत्वपूर्ण सीमा विवाद का केंद्र बन चुका है। यह मंदिर डोंगरेक पहाड़ियों की चोटी पर स्थित है और शैव धर्म से जुड़ा हुआ है। 1904 में सियाम और फ्रांसीसी कंबोडिया ने अपनी सीमा रेखा निर्धारित करने के लिए एक संयुक्त आयोग स्थापित किया। इस आयोग ने डोंगरेक पर्वत श्रृंखला की जलविभाजन रेखा को सीमा रेखा के रूप में स्वीकार किया, जिससे अधिकांश प्रेह विहियर मंदिर थाईलैंड की ओर आता था। हालांकि, 1907 में तैयार किए गए मानचित्र में मंदिर को कंबोडिया के क्षेत्र में दिखाया गया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
प्रेह विहियर मंदिर (फोटो- UNESCO)
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कंबोडिया जीता
- 1962 में, कंबोडिया ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में याचिका दायर की, जिसमें उसने प्रेह विहियर मंदिर पर कंबोडिया की संप्रभुता की मांग की। ICJ ने 9-3 के बहुमत से कंबोडिया के पक्ष में निर्णय दिया, जिसमें कहा गया कि मंदिर कंबोडिया के क्षेत्र में स्थित है और थाईलैंड को वहां से अपनी सेनाएं हटा लेनी चाहिए।
- 2008 में, कंबोडिया ने प्रेह विहियर मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पंजीकरण कराने का प्रयास किया।
- थाईलैंड ने इसका विरोध किया, क्योंकि पंजीकरण में मंदिर के आसपास के क्षेत्र को भी शामिल किया गया था, जिसे थाईलैंड अपना हिस्सा मानता था। कंबोडिया ने बाद में केवल मंदिर तक सीमित पंजीकरण कराया, जिसे यूनेस्को ने स्वीकार किया।
चली गई थाई पीएम की कुर्सी
थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा और कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के बीच एक लीक हुई फोन कॉल के कारण शिनावात्रा अपनी कुर्सी गंवा चुकी हैं। इस कॉल में पैतोंगतार्न ने हुन सेन को 'चाचा' (Uncle) कहकर संबोधित किया, जो उनके परिवार के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है। हुन सेन कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत के पिता हैं। 15 जून 2025 को हुई इस 17 मिनट की फोन कॉल में पैतोंगतार्न ने हुन सेन से कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद पर चर्चा की। उन्होंने कंबोडिया के साथ शांति बनाए रखने की इच्छा जताई और थाईलैंड के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की आलोचना की। कॉल के लीक होने के बाद थाईलैंड में राजनीतिक हलचल मच गई और प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न को उनके पद से जांच तक निलंबित कर दिया गया। इस घटना ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद को और जटिल बना दिया है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों पर गहरा प्रभाव डाला है।
थाईलैंड बनाम कंबोडिया की जंग में किसकी स्थिति मजबूत
| सैन्य स्थिति | थाईलैंड | कंबोडिया |
|---|---|---|
| सैन्य रैंकिंग | 24वां | 83वां |
| सक्रिय सैनिक | लगभग 3,60,000 | लगभग 1,70,000 |
| रिजर्व सैनिक | लगभग 2,00,000 | लगभग 1,00,000 |
| सैन्य शाखाएं | थाई सेना, नौसेना, वायुसेना | कंबोडियाई सेना, वायुसेना |
जंग के मुहाने पर खड़े हैं थाईलैंड और कंबोडिया
आज की तारीख में दोनों देश जंग के मुहाने पर खड़े हैं। एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं। यह सैन्य झड़प बुधवार (23 जुलाई 2025) को एक बारूदी सुरंग विस्फोट के बाद हुई, जिसमें थाईलैंड के पांच सैनिक घायल हो गए। इस घटना के बाद दोनों पक्षों ने अपने राजदूतों को निष्कासित कर दिया, जिससे राजनयिक तनाव काफी बढ़ गया। थाईलैंड के अधिकारियों ने कंबोडिया पर रूस निर्मित नई बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाया, जबकि कंबोडिया ने इन दावों को "निराधार आरोप" बताते हुए खारिज किया। कंबोडिया ने कहा कि ये विस्फोट पुराने संघर्षों की बची हुई बारूदी सुरंगों के कारण हुए। गुरुवार को सीमा पर लगभग 6 जगहों पर झड़पें हुईं, जिनमें प्राचीन प्रेह विहियर मंदिर के पास का इलाका भी शामिल है। गुरुवार को झड़पों के बाद स्थिति और बिगड़ गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले पर चर्चा के लिए एक तत्काल बैठक बुलाने का आग्रह किया। उन्होंने संघर्ष के बीच एक आपात सत्र भी बुलाया, जो न्यूयॉर्क में बंद कमरे में चला। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप-प्रवक्ता फरहान हक के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए किसी भी मुद्दे का समाधान करने का आग्रह किया। हालांकि शांति अभी कायम नहीं हुई और जिस तरह से दोनों पक्ष सीमा के पास से गांव खाली करवा रहे हैं, ऐसा लगता नहीं है कि फिलहाल शांति स्थापित होगी, दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज हो सकता है।
