ईंधन संकट से निपटने के लिए कौन-कौन से कदम उठा रही सरकारें, कहीं तेल पर लगाया कैप तो कहीं ऑफिस आने से मनाही

वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम प्रति बैरल 100 डॉलर को छू गए हैं। कच्चे तेल के दाम रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार 100 डॉलर तक पहुंचे हैं। इस चुनौती और समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों ने कदम उठाना शुरू कर दिया है।

Crude Oil Crisis: ईरान, अमेरिका-इजरायल युद्ध गुरुवार को 13वें दिन में प्रवेश कर गया। इस युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल आपूर्ति पटरी से उतर गई। देशों में एलपीजी-एनपीजी सहित तेल की किल्लत होने लगी है। ऑयल टैंकरों पर बुधवार रात ईरान के हमलों के बाद यह संकट और बड़ा हो गया है। वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम प्रति बैरल 100 डॉलर को छू गए हैं। कच्चे तेल के दाम रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार 100 डॉलर तक पहुंचे हैं। इस चुनौती और समस्या से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों ने कदम उठाना शुरू कर दिया है। तेल एवं ईंधन की खपत रोकने वाले कदम उठाए गए हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कच्चे तेल में हुई वृद्धि को थोड़े समय के लिए बताया है। उन्होंने कहा है कि कीमते जल्द 100 डॉलर के नीचे आ जाएगी। ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर लिखा कि 'अल्पकालिक तेल कीमतें, जो ईरान के परमाणु खतरे के खत्म होने पर तेजी से गिर जाएंगी, अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाने वाली बहुत छोटी कीमत है।'

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कई देशों में पैदा हुआ ईंधन संकट।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्य पूर्व के हालात यदि जल्द स्थिर नहीं हुए तो क्रूड ऑयल के दाम जल्द ही प्रति बैरल 150 डॉलर तक पहुंच जाएंगे। इससे देशों में महंगाई बढ़ेगी जिसका बोझ आम जनता को उठाना होगा। तेल के बढ़े हुए दाम से होने वाले नुकसान को कम करने और ईंधन आपूर्ति बहाल रखने के लिए सरकारों ने अपने यहां एहतियातन कदम उठाए हैं।

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