Explainer: क्या है संसदीय कार्रवाई का रूल नंबर 349? जिस पर लोकसभा में भिड़ गए राहुल-राजनाथ

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के प्रस्तावित संस्मरण का जिक्र किया। जिस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस पुस्तक का वो हवाला दे रहे हैं वह अभी अप्रकाशित है और उसका हवाला देना नियमों के विरुद्ध है। सत्तापक्ष ने कहा कि वे संसदीय कार्यवाही के रूल 349 का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया कि आखिर रूल 349 है क्या, और संसद में इसकी भूमिका क्यों इतनी अहम मानी जाती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सोमवार को लोकसभा में तीखी राजनीतिक तनातनी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के प्रस्तावित संस्मरण से जुड़े कुछ अंशों का हवाला दिए जाने के बाद सदन का माहौल गरमा गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसका विरोध जताया और फिर सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। इसके बाद सत्ता पक्ष और कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्तापक्ष ने संसदीय कार्यवाही के रूल 349 का हवाला देते हुए ऐसे संदर्भों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया। ऐसे में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि संसदीय कार्यवाही को चलाने के नियम क्या होते हैं। इसके अलावा जिस रूल नंबर 349 की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वो आखिर क्या है और इसमें क्या निर्देश दिए गए हैं।

क्या है संसदीय कार्यवाही का रूल नंबर 349?

क्या है संसदीय कार्यवाही का रूल नंबर 349?

सबसे पहले जानें लोकसभा में क्या हुआ

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा जनरल नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने पर भारी हंगामा हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस नेता पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को कई बार रोका। इस दौरान सत्ता पक्ष ने कहा कि राहुल गांधी ने संसदीय कार्यवाही के रूल नंबर 349 का उल्लंघन किया। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और आखिर में चार बजे के करीब दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

अब जान लें क्या है संसदीय कार्यवाही का नियम 349

संसद में संसदीय कार्यवाही को सुचारू और शांति पूर्वक चलाने के लिए नियम बनाए गए हैं। चाहे राज्यसभा हो या लोकसभा दोनों सदनों के सभी सदस्यों को इनका पालन करना अनिवार्य है। ये लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के लिए अलग-अलग हैं। इन्ही में से एक रूल 349 भी है। लोकसभा के Rules of Procedure and Conduct of Business का हिस्सा है। यह नियम तय करता है कि सदन के भीतर किसी सदस्य द्वारा किन बातों,दस्तावेजों या संदर्भों का उल्लेख किया जा सकता है और किनका नहीं। सरल शब्दों में कहें तो रूल 349 संसद में बोले जाने वाले शब्दों और उद्धृत किए जाने वाले दस्तावेजों पर 'फिल्टर'का काम करता है।इस नियम के तहत सदन में कोई भी सदस्य

रूल 349 के तहत क्या प्रतिबंधित है?

इस नियम के अनुसार कोई भी सांसद सदन में अप्रकाशित दस्तावेजों जैसे ड्राफ्ट रिपोर्ट, अप्रकाशित संस्मरण, निजी डायरी,पत्र या नोट्स का हवाला नहीं दे सकता। इनमें ऐसे दस्तावेज भी हैं जो आधिकारिक रूप से सार्वजनिक न हों। ऐसे संदर्भ जो सदन के पटल पर रखे नहीं गए हों। सरल शब्दों में कहें तो अगर कोई दस्तावेज जो संसद के रिकॉर्ड में शामिल नहीं है या सरकार या स्पीकर द्वारा अधिकृत नहीं है तो उसका उल्लेख नियम विरुद्ध माना जाता है। इसके अलावा, संवेदनशील संस्थाओं जैसे सेना, खुफिया एजेंसियां, न्यायपालिका या संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से जुड़ी अप्रमाणित बातें उनका जिक्र रोका जा सकता है।

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