India-Maldives Relations : जनवरी 2024 के आस-पास मालदीव की सरकार में भारत विरोधी भावनाएं इतनी तीव्र हुईं दोनों देशों के रिश्तों में बेहद तल्खी आ गई। आपसी रिश्ते तेजी के साथ खराब होने शुरू हुए और ये अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए। इसके बाद कुछ समय तक दोनों देशों के आपसी संबंधों में एक तरह से ठहराव आ गया। आपसी संबंधों को पटरी से उतारने में 'इंडिया आउट' और 'बॉयकॉट मालदीव' जैसे नारों की भी भूमिका रही लेकिन समय के बहाव के साथ रिश्ते में जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघलनी शुरू हुई और 25 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिन के दौरे पर मालदीव पहुंचे। माले पहुंचने पर पीएम मोदी का स्वागत राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू ने जिस गर्मजोशी और राजकीय सम्मान के साथ किया उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि ये वही मोइज्जू हैं जिन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के खिलाफ बयानबाजी की थी।
फिट पटरी पर आए भारत और मालदीव के रिश्ते। तस्वीर-MEA
चीन समर्थक रहे हैं मोइज्जू
मोइज्जू का भारत विरोधी रुख, चीन के प्रति उनके झुकाव और कुछ हद तक घरेलू राजनीति की वजह से माना जाता है। लेकिन अब उन्हें इस बात का अहसास हो गया है कि संकट और मुश्किल के समय भारत ही उनका सबसे बड़ा मददगार है। जनवरी 2024 के बाद के वक्त और भारत की तरफ से मालदीव के हित में उठाए गए कदमों को उन्होंने जांचा-परखा और देखा होगा। चीन की असलियत भी उन्हें धीरे-धीरे समझ में आई होगी। 2023 में मोइज्जू जब चुनकर आए तो कूटनीतिक गलियारों में मालदीव में चीन का दबदबा एवं प्रभाव बढ़ने की चर्चा तेज हो गई। खुद मोइज्जू ने भी भारत से दूरी और चीन से करीबी का इजहार कर दिया। मालदीव की परंपरा रही है कि राष्ट्रपति कोई भी बने उसकी पहली आधिकारिक यात्रा भारत की होती है लेकिन मोइज्जू ने इस परंपरा को तोड़ा। वह भारत न आकर तुर्किये और फिर चीन गए। भारत विरोधी बयान देकर वह अपने पत्ते एक-एक कर खोलने लगे।
माले में मोहम्मद मोइज्जू के साथ पीएम मोदी। तस्वीर-MEA Twitter
राष्ट्रपति बनने पर 'इंडिया आउट' का नारा दिया
मोइज्जू यही नहीं रुके वे अपने 'इंडिया आउट' के नारे पर आगे बढ़े। उन्होंने मालदीव में मौजूद भारतीय सैन्यकर्मियों को अपनी संप्रभुता के लिए खतरा बताया। मोइज्जू सरकार ने भारत सरकार से कहा कि वह अपने सैन्यकर्मियों और मानवीय सहायता में मदद करने वाले हेलिकॉप्टरों को वापस ले ले। मोइज्जू के इस अनुरोध पर भारत सरकार ने आने वाले दिनों में अपने सैन्यकर्मी और हेलिकॉप्टर वापस बुला लिए। मालदीव में ये हेलिकॉप्टर वहां सुदूर द्वीपों से बीमारी लोगों को बाहर निकालने का काम करते थे जबकि सैन्यकर्मी इन हेलिकॉप्टरों के रखरखाव एवं परिचालन के लिए थे। पीएम नए साल के मौके पर लक्षद्वीप गए और वहां के समुद्र तट की खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट करते हुए भारतीयों से छुट्टियां मनाने के लिए वहां आने की अपील की। पीएम ने अपने ट्वीट में मालदीव का नाम नहीं लिया। लेकिन मालदीव सरकार के मंत्रियों को यह बात अखर गई। मोइज्जू सरकार के तीन मंत्रियों ने X (जो पहले ट्विटर था) पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट किए। इन पोस्ट्स के बाद भारत से भी प्रतिक्रिया होनी लाजिमी थी।
माले में गॉर्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करते पीएम मोदी। तस्वीर-EMI Twitter
मालदीव की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई
भारत में लोगों ने सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट मालदीव' अभियान चलाया। भारत सरकार ने दिल्ली में मालदीव के राजदूत तलब कर मंत्रियों के ट्वीट को उनसे कड़ा विरोध जताया। भारत के विरोध पर मालदीव सरकार ने अपने तीन मंत्रियों को तो जरूर हटा दिया लेकिन पीएम के बारे में कही गईं बातों को लेकर भारतीयों में गुस्सा शांत नहीं हुआ। मालदीव में छुट्टियों पर जाने वाले भारतीयों ने अपनी यात्रा टालनी शुरू कर दी। इससे मालदीव के पर्यटन उद्योग पर भारी असर पड़ा। कुछ ही समय में मालदीव का पर्यटन उद्योग चरमराने लगा। इन घटनाओं के बाद भारत और मालदीव के रिश्तों में एक तरह से ठहराव आ गया। मोइज्जू सरकार को लगा था कि भारत के साथ आक्रामक रुख दिखाने पर चीन उन्हें आर्थिक मदद देगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। धीरे-धीरे मालदीव में महंगाई और पटरी से उतरती अर्थव्यवस्था से मोइज्जू सरकार संकट में घिर गई। विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई। मालदीव के इस हालात पर भारत की नजर थी और उसने हमेशा की तरह इस बार भी बिना देरी किए मदद का हाथ मोइज्जू की तरफ बढ़ाया।
संवाद, संपर्क, सहयोग की नीति पर आगे बढ़ा भारत
मालदीव की इस मुश्किल घड़ी में संपर्क और संवाद स्थापित करने की नीति पर भारत आगे बढ़ा। पिछले साल गुट निरपेक्ष सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मालदीव के अपने समकक्ष से मुलाकात की। इसके बाद आम बजट में भारत ने मालदीव की मदद बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दी। साथ ही अनुदान भी बढ़ाकर 400 से 600 करोड़ रुपए कर दिया। इसके बाद मई 2024 में मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर भारत आए। वहीं अक्टूबर में खुद राष्ट्रपति मुइज्जु पांच दिनों के दौरे पर भारत पहुंचे। इस दौरान व्यापक आर्थिक एवं मैरीटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप विजन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत दौरे पर आए मुइज्जु ने बयान दिया कि उनका देश ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारतीय हितों पर आंच आए। उनका यह बयान काफी अहम माना गया।
माले में पीएम मोदी के स्वागत में रेड कॉर्पेट बिछाई गई। तस्वीर-MEA Twitter
कर्ज में फंसे देशों से मोइज्जू ने सबक सीखा
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की नीति ने भी मोइज्जू का मन बदलने के लिए विवश किया। मालदीव यह देखता आया है कि हिंद महासागर के देश मॉरीशस की मदद भारत भरपूर करता आया है। खासकर अपने पड़ोसियों को हर क्षेत्र में मदद करने के लिए भारत आगे रहा है। भारत की 'नेबरहुट फर्स्ट' और 'सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन' सागर नीतियां इलाके के देशों को मदद और सहयोग का आश्वासन देती हैं। भारत मजबूरी का फायदा नहीं उठाता जबकि चीन की नीयत इसके उलट है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपने कर्ज के जाल में फंसाकर देशों की संपत्तियों को गिरवी रख लेता है। इससे एक बड़ा सबक मालदीव को मिला है।
