Ceasefire Kya Hota Hai: भारत और पाकिस्तान के मध्य तनावपूर्ण माहौल के बीच गतिरोध रोकने पर सहमति बन गई है। विदेश मंत्रालय के सचिव विक्रम मिस्त्री (Vikram Misri) ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। यह सीजफायर शनिवार शाम पांच बजे से लागू हो गया। विदेश सचिव ने बताया कि दोनों देशों के बीच गोलीबारी रोकने पर सहमति बनी है। DGMO भारत और DGMO पाकिस्तान के बीच दोपहर 3.35 बजे बातचीत हुई। दोनों के बीच यह सहमति बनी कि थल, वायु और समुद्र में सभी प्रकार की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई को शाम 5 बजे (भारतीय समयानुसार) से रोका जाएगा। सीजफायर को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने की जानकारी दी। तो ये सीजफायर क्या है और यह कब लागू होता है? इसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं।
सीजफायर क्या है
सीजफायर क्या होता है?
भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों से बढ़ रहे तनाव पर विराम लग गया है। दोनों देशों के बीच सीजफायर (Ceasefire) पर सहमति बन गई है, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान की सेना एक दूसरे के खिलाफ किसी तरह की गोलाबारी या हमला नहीं करेंगे। इस दौरान सीजफायर चर्चा में आ गया है। दरअसल, सीजफायर का असली मतलब दो देशों के मध्य जारी गतिरोध पर युद्धविराम या संघर्ष पर विराम लगना होता है। इसके लागू होने के तत्काल प्रभाव से दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष पर अस्थाई या स्थाई तौर पर रोक लग जाती है। अधिकतर बॉर्डर पर अक्रामक एक्शन को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसमें किसी प्रकार की संधि की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह दोनों देशों के बीच आपसी सहमति पर निर्भर करता है।
सीजफायर पर सहमति बनने के बाद दोनों देश वादा करते हैं कि इसे बॉर्डर पर अक्रामक कार्रवाई रोक देंगे। यह समझौता पूरा होने पर अगर कोई देश बॉर्डर पर अपने एक्शन को आगे बढ़ाता है तो इसे सीजफायर का उल्लंघन माना जाता है। हालांकि, पाकिस्तान अक्सर इसका उल्लंघन करता है, जिसकी खबरें बीच-बीच में आती रहती हैं।
भारत-पाक के बीच कब बनी सीजफायर पर सहमति?
अगर, भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बार सीजफायर फैसले की बात करें तो जब 1947 में कश्मीर के लिए दोनों देशों के बीच जंग हुई तो यूनाइटेड नेशन ने युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता की। यूएन के हस्तक्षेप के बाद 1949 में भारत-पाकिस्तान ने सहमति से जम्मू-कश्मीर पर एक लाइन स्थापित की, जिसे सीजफायर लाइन माना जाता है। इस लाइन पर सहमित बनाने के लिए भारत और पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ ने बैठक की थी।
दोनों देशों को भौगोलिक तौर पर अलग करने वाली लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर बने बैरियर्स समझौते के मुताबिक, दोनों देशों की सरकारों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि वे एक-दूसरे के खिलाफ दुष्प्रचार रोकने की कोशिश करेंगी। दोनों देशों ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर तैनात की गई सेना को हटा लेंगे। हालांकि, भारत और पाक के मध्य सीजफायर समझौते का पड़ोसी मुल्क की ओर से बार-बार उल्लंघन किया गया।
भारत ने 1990 में एलओसी पर बैरियर्स लगाने शुरू किए, लेकिन 1999 में फिर से दोनों देश युद्ध के लिए आमने-आमने आ गए, जिसे करगिल युद्ध (Kargil War 1999) कहा गया। फिर 2004 तक बैरियर्स का काम पूरा हो गया। पाकिस्तान बैरियर्स लगाने से नाराज था। पाकिस्तान को यह पसंद नहीं था कि भारत बॉर्डर पर बाड़ लगा रहा है। नवंबर 2003 में भारत के विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच सीजफायर का ऐलान किया। यह फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कोशिशों का नतीजा था। 25 नवंबर 2003 को सीजफायर लागू हुआ। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह सीजफायर 450 मील लंबी (LoC) अंतरराष्ट्रीय सीमा और सियाचीन ग्लेशियर पर भी लागू हुआ।
एलओसी कब स्थापित की गई?
1971 में भारत और पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला समझौते (Shimla Samjhauta) के बाद 2 जुलाई 1972 को एलओसी स्थापित की गई थी। एलओसी की लंबाई लगभग 740 से 776 किलोमीटर के बीच है। यह एक सैन्य नियंत्रण रेखा के रूप में कार्य करती है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं दी गई। भारत नियंत्रण रेखा पर महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति रखता है, जहां किलेबंद चौकियां और बंकर चौबीस घंटे तैनात रहते हैं।
