CAA Rules Notified: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) आज से देशभर में लागू हो गया है। सोमवार शाम केंद्र सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जिसके बाद सीएए से जुड़े नियम भी देश में लागू हो गए। यह कानून भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करेगा। सीएए के तहत इन देशों से आए हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान शामिल है। संसद के दोनों सदनों से सीएए 11 दिसंबर, 2019 में पारित किया गया था। इसके एक दिन बाद राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी दे दी गई थी।
देश में लागू हुआ सीएए कानून
आइए जानते हैं, सीएए लागू होने के बाद किन लोगों को इससे फायदा मिलेगा? किसे नागरिकता मिलेगा? इसके लिए कैसे अप्लाई किया जाएगा? और इस कानून के प्रावधान क्या-क्या हैं?
किन लोगों को पर लागू होगा कानून?
यह कानून उन लोगों पर लागू होगा, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए वहां के अल्पसंख्यकों को इस कानून के जरिए यहां भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी। ऐसी स्थिति में आवेदनकर्ता को साबित करना होगा कि वो कितने दिनों से भारत में रह रहे हैं। उन्हें नागरिकता कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को भी पूरा करना होगा।
कौन-कौन ले सकता है नागरिकता?
नागरिकता संशोधन कानून के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगा। आवेदकों को वह वर्ष बताना होगा जब उन्होंने यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था। एक अधिकारी ने कहा, आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।
कहां और कैसे कर सकेंगे नागरिकता के लिए अप्लाई
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया है। आवेदकों इसी पोर्टल पर नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकेंगे। आवेदनकर्ता को साबित करना होगा कि वो कितने दिनों से भारत में रह रहे हैं। उन्हें नागरिकता कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को भी पूरा करना होगा।
CAA लागू होने से क्या होगा फायदा?
यह कानून देश में इन तीन देशों से आए प्रताड़ित लोगों के पुनर्वास और नागरिकता की कानूनी बाधाओं को दूर करेगा। इसके जरिए सांस्कृतिक, भाषायी, सामाजिक पहचान की रक्षा होगी। इसके साथ ही इन शरणार्थियों के आर्थिक, व्यावसायिक, फ्री मूवमेंट, संपत्ति खरीदने जैसे अधिकार सुनिश्चित होंगे।
