पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों भीषण हिंसा और विद्रोह की आग में जल रहा है। बलूच स्वतंत्रता सेनानियों के प्रमुख संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने हाल ही में अपनी एक नई और बेहद संगठित महिला लड़ाकू इकाई की घोषणा की है, जिसका नाम 'करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन' (KAAD) रखा गया है।
पाकिस्तान सेना पर बलूच महिलाओं का काल बनकर टूटा दस्ता (Photo: AI Generated/Newsroom Verified)
इस महिला दस्ते ने तुर्बत इलाके में चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) हाईवे पर पाकिस्तानी सेना के त्वरित प्रतिक्रिया बल (QRF) के तीन वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दावा किया कि इस ऑपरेशन में कम से कम 9 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।
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क्या है KAAD और कैसे हुआ यह हमला?
इस दस्ता का नाम बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता और छात्र नेता करीमा बलोच के नाम पर रखा गया है, जिनकी 2020 में कनाडा के टोरंटो में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। BLF के मीडिया सेल 'आशूब' द्वारा जारी किए गए फुटेज में इस हमले से ठीक पहले एक महिला कमांडर अपने लड़ाकों को ब्रीफिंग देती नजर आ रही है।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक जारी वीडियो में महिला लड़ाकों को बेहद करीब से सेना के वाहनों पर एके-47 और स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलियां बरसाते देखा जा सकता है। संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वहाराम बलोच ने बताया कि इस अभियान को उनके 'कुर्बान यूनिट' का भी सहयोग मिला था, जिसने सेना की घेराबंदी को तोड़ा। हालांकि, इस हमले के दौरान कुर्बान यूनिट का एक लड़ाका चाकर मुराद उर्फ दिलीप जान मारा गया।
बढ़ती ताकत और अभियानों का दायरा
BLF के मुताबिक KAAD केवल एक प्रतीकात्मक इकाई नहीं है, बल्कि इसे कई वर्षों के कड़े और कठोर सैन्य प्रशिक्षण के बाद एक पूर्ण संगठित लड़ाकू बल के रूप में विकसित किया गया है। एक जारी किए गए वीडियो में महिला लड़ाके कलात के मंगचर इलाके में गाड़ियों की नाकाबंदी कर स्नैप चेकिंग करती हुई भी दिखाई दे रही हैं।
यह घटना दिखाती है कि बलूच स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका अब केवल विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे अग्रिम मोर्चे पर बंदूक उठाकर सीधी जंग लड़ रही हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी संघर्ष का असर
यह हमला ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब पाकिस्तान दोहरे मोर्चे पर घिरा हुआ है। एक तरफ जहां बलूचिस्तान के भीतर बलूच विद्रोही लगातार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच डूरंड लाइन सीमा को लेकर भयानक सैन्य संघर्ष जारी है।
पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच विद्रोहियों को अपने देश की जमीन का इस्तेमाल करने दे रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले किए थे, जिसके जवाब में अफगान तालिबान की सेना ने भी पाकिस्तानी चौकियों पर भारी तोपखाने से गोलाबारी की है।
सीमा पर अफगानिस्तान के साथ जारी इस हिंसक झड़प के कारण पाकिस्तानी सेना का ध्यान बंटा हुआ है, जिसका सीधा फायदा बलूच विद्रोही उठा रहे हैं। बलूच लड़ाकों के बढ़ते हमलों और अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है।
