Zanjeer Movie Budget and Collection: साल था 1973, बॉलीवुड में रोमांस के राजकुमार चल रहे थे। हीरो मतलब चॉकलेटी चेहरा, हल्की मुस्कान, गीत-संगीत और हीरोइन के पीछे भागना। लेकिन तभी एक फिल्म आई, जिसने सारे नियम तोड़ दिए। इसमें हीरो गुस्से में था, उसकी आंखों में आग थी, आवाज में दर्द और गला घोंटने वाला गुस्सा, वो फिल्म थी 'जंजीर'। 90 लाख रुपये में बनी ये फिल्म न सिर्फ सुपरहिट हुई, बल्कि इसने अमिताभ बच्चन को रातों-रात 'एंग्री यंग मैन' बना दिया। वो दौर था जब अमिताभ को लगातार 12 फ्लॉप फिल्में मिल चुकी थीं। कोई प्रोड्यूसर उन्हें हीरो नहीं बनाना चाहता था। लेकिन प्रकाश मेहरा ने दांव लगाया और जीत गए। सलीम खान के स्क्रीन प्ले ने सबको अपना दीवाना बना लिया।
Image Source: Zanjeer Movie
क्या है फिल्म जंजीर की कहानी?
फिल्म 'जंजीर' की कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी विजय खन्ना की जिसका किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया है। विजय खन्ना भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ता है और एक तेल माफिया गैंग के खिलाफ एक हाई-प्रोफाइल हत्या की जांच करता है। वो न तो रिश्वत लेता है, न गलत लोगों को छोड़ता है। ऊपर से दबाव आता है, ट्रांसफर कर दिया जाता है, लेकिन विजय किसी के सामने नहीं झुकता और अंत में उसे मुंबई भेजा जाता है। वहां, वह एक हत्या की जांच में जुट जाता है, जिसकी चश्मदीद गवाह माला है। फिल्म में माला का किरदार जया बच्चन ने निभाया है। जांच के दौरान, विजय को पता चलता है कि हत्या के पीछे ताकतवर अपराधी तेजा का हाथ है, जो एक तेल माफिया गैंग चलाता है। तेजा विजय के बचपन के माता-पिता की हत्या का जिम्मेदार भी है। इसके बाद फिल्म में खूब सारे एक्शन सीन्स देखने को मिलते हैं, जिसने लोगों को तालियां और सीटियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
फिल्म का बजट-कलेक्शन
जंजीर महज 90 लाख रुपये के मामूली बजट में बनी थी। उस दौर में ज्यादातर बड़ी फिल्में भी 1 से 1.5 करोड़ तक में बन जाती थीं, इसलिए 90 लाख को प्रोड्यूसर प्रकाश मेहरा ने बहुत सोच-समझकर खर्च किया। कोई बड़ा सेट नहीं, कोई विदेशी लोकेशन नहीं, ज्यादातर शूटिंग मुंबई के स्टूडियो और असली लोकेशनों पर हुई। रिलीज के बाद जो हुआ, वो बॉलीवुड के इतिहास में लिखा जा चुका है। 90 लाख रुपये में बनी इस फिल्म ने 17 करोड़ रुपये कमाए थे। इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन से फ्लॉप का ठप्पा हटा दिया था।
वो डायलॉग्स जो आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं
सलीम-जावेद की कलम से निकले डायलॉग्स ने फिल्म को अमर बना दिया। कुछ लाइनें तो आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं।
1. ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं
2. जब तक बैठने को ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो
3. इस इलाके में नए आए हो जनाब, वरना शेर खान को कौन नहीं जानता
4. शेर खान आज का काम कल पर नहीं छोड़ता
5. चिल्लाओ मत साहब, नहीं तो गला खराब हो जाएगा
फिल्म की स्टारकास्ट
फिल्म जंजीर की कास्टिंग को आज भी बॉलीवुड की सबसे शानदार कास्टिंग मानी जाती है। अमिताभ बच्चन को उस वक्त कोई हीरो नहीं बनाना चाहता था, लेकिन प्रकाश मेहरा ने उनमें विजय खन्ना देख लिया। उनकी लंबाई, गहरी आवाज और आंखों का गुस्सा सब कुछ परफेक्ट था। जया बच्चन ने माला के किरदार में एक नई जान डाल दी थी। प्राण साहब ने शेर खान का किरदार ऐसा निभाया कि दर्शक उन्हें विलेन मानते-मानते दोस्त मानने लगे ये हिंदी सिनेमा में पहली बार हुआ था। अजीत का तेजा आज भी सबसे स्टाइलिश विलेन माना जाता है। इसके अलावा और भी स्टार्स फिल्म में नजर आए थे।
कल्ट बन गई फिल्म
'जंजीर' कल्ट इसलिए बनी क्योंकि उसने 1970 के दशक के भारत के गुस्से को, उसकी निराशा को और उसकी बगावत को सीधे स्क्रीन पर उतार दिया। विजय खन्ना वो ही आम आदमी था जो वर्दी पहनकर भी नहीं झुकता। विजय वो करता है जो हर दर्शक अपने मन में करना चाहता था। गुंडों को पीटना, भ्रष्ट अफसरों को लताड़ना और कानून से ऊपर उठकर इंसाफ करना। पहली बार हिंदी फिल्म का हीरो गीत नहीं गाता था, मां को याद करके रोता नहीं था। सलीम-जावेद ने जो डायलॉग लिखे, वो थिएटर में तालियों और सीटियों की बौछार करवा दी थी। इस एक फिल्म ने पूरा ट्रेंड बदल दिया। इसके बाद आने वाली हर एंग्री यंग मैन वाली फिल्म कहीं न कहीं जंजीर की छाया में ही बनी।
