Shabana Azmi on Batwara 1947 Flop: बॉलीवुड एक्टर सनी देओल (Sunny Deol) की फिल्म बंटवारा 1947 (Batwara 1947) को लेकर रिलीज से पहले काफी उम्मीदें थीं। फिल्म में सनी देओल को एक ऐसे किरदार में दिखाया गया, जो उनकी आमतौर पर बनी एक्शन हीरो वाली इमेज से काफी अलग था। लेकिन सिनेमाघरों में रिलीज के बाद फिल्म उम्मीद के मुताबिक दर्शकों को खींच नहीं पाई। अब फिल्म में अहम रोल निभाने वाली शबाना आजमी (Shabana Azmi) ने इसके बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन को लेकर अपनी बात रखी है। तो चलिए जानते हैं Zoom से बात करते हुए शबाना आजमी ने क्या रिएक्शन दिया है, जिसकी इतनी चर्चा हो रही है।
शबाना आजमी ने फिल्म को लेकर कही ये बात (Image Source: IMDb/ Zoom TV Youtube)
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शबाना आजमी ने बताया क्यों फ्लॉप हुई फिल्म
एक्ट्रेस शबाना आजमी एक बार फिर से फिल्म बंटवारा को लेकर चर्चा में आ गई है। शबाना आजमी ने बताया कि ये फिल्म फ्लॉप क्यों हुई। Zoom से बात करते हुए शबाना आजमी ने कहा, 'बात ये है कि आप सनी देओल को मुस्लिम मान ही नहीं सकते। कुली और कई दूसरी फिल्मों में अमिताभ बच्चन ने आराम से मुस्लिम किरदार निभाए। दीवार में उन्होंने 786 लगाया और लोग मान गए। तो हम इसे कैसे समझें? क्या जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जहां ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं? मुझे समझ नहीं आ रहा।' फिल्म के बॉक्स ऑफिस और लोगों की प्रतिक्रिया पर हैरानी जताते हुए शबाना ने कहा, 'मुझे हैरानी है लोग इस पर कैसे रिएक्ट कर रहे हैं। जिन्होंने फिल्म देखी है वो भी सोचते हैं सनी देओल पाकिस्तानी किरदार निभा रहे हैं। वो नहीं निभा रहे। ये बात उनके दिमाग में बैठ ही नहीं रही। बुशरा अहमद (पाकिस्तानी एक्टर) ने भी फिल्म की भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा खलनायक का पंजाबी बोली सही नहीं है। अगर दोनों धर्मों को फिल्म पसंद नहीं आ रही तो इसका मतलब ये शुद्ध और खूबसूरत है। समस्या ये है कि इस माहौल में हिंदुस्तान-पाकिस्तान के विषय को छू ही नहीं सकते, जो बहुत निराशाजनक है। ये फिल्म किसी भी तरह से राजनीतिक रूप से गलत नहीं है। इसमें कोई गलती नहीं निकाल सकते। सनी ने बहुत अच्छा काम किया है। हैरानी और विरोधाभास ये है कि जब मैं लोगों से मिलती हूं तो वो फिल्म की इतनी तारीफ क्यों कर रहे हैं?'
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छात्रआंदोलन में शामिल होने पर कही ये बात
शबाना आजमी ने बताया कि 'हमने पत्र में पीएम से अपील की कि बस उनकी बात सुन लें। उनसे बात करें। हमने कहा हम प्रेस में नहीं जाएंगे। इसलिए आपको लिख रहे हैं। मैं बता नहीं सकती वो कैसा अनुभव था। मैंने कभी वैसी ऊर्जा, वैसी उम्मीद, वैसा गुस्सा नहीं देखा। मैंने इन छात्रों को पीटे जाते देखा, लेकिन उसके बाद भी वो मेरे पास आकर पूछते कि क्या मैं सुरक्षित हूं? मैंने कहा तुमने तो अभी लाठी खाई है। उन्होंने कहा एक लाठी खाने के बाद फिर लाठी से डर नहीं लगता।' एक्ट्रेस ने आगे कहा कि 'मैं सोचकर गई थी कि इन लोगों का समर्थन करूंगी, लेकिन हर बार मैं और मजबूत होकर लौटी। हम युवाओं को कोसते रहते हैं और कहते हैं कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। नाकामी हमारी रही है। हम उन्हें वो रोल मॉडल नहीं दे पाए जिनका वो अनुसरण कर सकें।'
