Lok Sabha Election 2o24: लोकसभा चुनाव सिर पर आ चुके हैं। बीजेपी पूरे जोर-शोर से उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों में चुनाव प्रचार में जुट गई है, लेकिन कांग्रेस का मुख्य फोकस दक्षिण भारत या फिर राजस्थान पर है। दक्षिण भारत की तो बात समझ में आती है कि कांग्रेस को अपनी साख बचाने के उम्मीद यहीं से है। हालांकि, पूरे उत्तर भारत को छोड़कर राजस्थान में गांधी परिवार की सक्रियता ने सियासी गलियारे में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल गांधी
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र की लॉन्चिंग के बाद पहली रैली राजस्थान में ही की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ खुद सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी राजस्थान में मौजूद रही थीं। अब गुरुवार को राहुल गांधी भी राजस्थान पहुंचे हैं। दरअसल, राजस्थान में गांधी परिवार के धुआंधार प्रचार के पीछे पार्टी का इंटरनल सर्वे है।
खुल सकता है कांग्रेस का खाता
पिछले दो लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी है। हालांकि, इस बार कांग्रेस को राजस्थान में खाता खुलने की उम्मीद है। पार्टी अपने इंटरनल सर्वे के आधार पर ये दावा कर रही है कि वो राजस्थान में कम से कम 5 सीटें जीत रही है। सर्वे के मुताबिक़ पूरे उत्तर भारत में सिर्फ़ राजस्थान में ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी पाँच सीटें जीत सकती है। यही वजह है कांग्रेस ने हाल के दिनों में अपनी पूरी ताक़त राजस्थान में झोंक दी है। चाहे कांग्रेस के मैनिफेस्टो की पहली रैली हो, जिसनें सोनिया और प्रियंका गांधी मौजूद थीं या फिर आज की राहुल गांधी की रैली हो। कहा तो ये भी जा रहा है कि सोनिया गांधी ने राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान का चयन भी इसी स्ट्रैटेजी के तहत किया है।
काम कर रही गहलोत की स्कीम
राजस्थान विधानसभा चुनाव में पार्टी भले ही हार गई हो, लेकिन गहलोत सरकार की चर्चित स्वास्थ्य नीति और ओल्ड पेंशन स्कीम कांग्रेस राज्य के विधानसभा चुनाव में ठीक ठाक सीट लाने में कामयाब रही थी। इन्हीं दोनों मुद्दों को आधार बनाकर लोकसभा में कांग्रेस इस बार खाता खोलने की उम्मीद लिए बैठी है। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि यही वजह है बीजेपी के सीटिंग सांसद भी कांग्रेस में आ रहे हैं। पार्टी के इंटरनल सर्वे के मुताबिक, राजस्थान के जालोर, चूरु, झुनझूँ, दौसा, जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर कांग्रेस को जीत का पूरा भरोसा है।
